दिल्ली सरकार अपनाने जा रही डूंगरपुर नगरपरिषद का वाटर मॉडल, जानिए कैसे होगा जल संरक्षण

प्रदेश की डूंगरपुर नगरपरिषद ने स्वच्छता के क्षेत्र में तो प्रदेश, देश के साथ अन्तराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है.

दिल्ली सरकार अपनाने जा रही डूंगरपुर नगरपरिषद का वाटर मॉडल, जानिए कैसे होगा जल संरक्षण
जल ही जीवन है और आज के भौतिक युग में जल की उपयोगिता भी बढ़ गई है.

अखिलेश शर्मा, डूंगरपुर: प्रदेश की डूंगरपुर नगरपरिषद ने स्वच्छता के क्षेत्र में तो प्रदेश, देश के साथ अन्तराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई है, लेकिन डूंगरपुर नगरपरिषद स्वच्छता के साथ अब अपने जल संरक्षण व जल संचय के मॉडल को लेकर भी देश में अपनी अलग पहचान बनाई है. नगरपरिषद के जल संरक्षण व जल संचय मोडल के चलते जहा डूंगरपुर शहर का भूल जल स्तर बढ़ा है. वहीं, जल संरक्षण व जल संचय (Water Conservation) की दिशा में किये कार्यों के बदोलत डूंगरपुर नगरपरिषद को दो राष्ट्रीय स्तर के सम्मान मिल चुके हैं और डूंगरपुर नगरपरिषद के इस मॉडल को दिल्ली सरकार भी अपनाने जा रही है.

जल ही जीवन है और आज के भौतिक युग में जल की उपयोगिता भी बढ़ गई है. हम जमीन से जल का दोहन कर उसका उपयोग तो कर रहे हैं, लेकिन उस जल का संचय नहीं होने से भू जल स्तर गिरता ही जा रहा है. कुछ संस्थाए ऐसी भी होती है जो जल संचय का काम कर रही है और दुसरो को भी जल की उपयोगिता को बताते हुए जल संचय के लिए जागरूक कर रही है.  ऐसा ही कुछ कर रही प्रदेश की डूंगरपुर नगरपरिषद भी. डूंगरपुर नगरपरिषद के निवर्तमान सभापति के के गुप्ता की पहल पर नगरपरिषद द्वारा शुरू की गई जल संचय व जल संरक्षण की मुहीम के अब परिणाम दिखने लगे हैं. 

नगरपरिषद ने सबसे शहर की मृत रूप में पड़ी प्राचीन व एतिहासिक बावडियों की सफाई व खुदाई करते हुए उन्हें पुनः जीवित किया और उसका परिणाम ये निकला की इन बावडियों से 8 लाख लीटर पानी प्रतिदिन जलदाय विभाग को मिल रहा है और वहां से इस पानी की आपूर्ति शहरवासियों को हो रही है. मृत हो चुकी बावडियों के जीवित होने से आज शहर के भीतरी क्षेत्रों में पेयजल की समस्या ख़त्म हो गई है और लोगों की परेशानी भी दूर हो गई है. ईतना ही नहीं शहर में विभिन्न जगहों पर आरओ वाटर प्लांट लगाकर 5 रुपए में 20 लीटर पानी भी उपलब्ध करवाया जा रहा है.

ईतना ही अगली कड़ी में नगरपरिषद ने  जल संचय व जल संरक्षण का काम हाथ में लिया है, जिसके तहत डूंगरपुर नगरपरिषद ने डूंगरपुर शहर में पहले सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग करवाया वही उसके बाद आवासीय भवनों में वर्षा के जल को सहेजने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाये. शहर को डार्क जॉन से मुक्त करने के उद्देश्य से नगरपरिषद द्वारा शहर के 500 से अधिक घरो में वाटर हार्वेस्टिंग का काम करवाया. डूंगरपुर नगर परिषद के निवर्तमान सभापति केके गुप्ता ने नवाचार करते हुए ऐसा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार किया जो ज्यादा कारगर ओर सस्ता है. इस मॉडल में छत का वर्षा जल पाइप के जरिये पाइप से ही बने एक फ़िल्टर में आता है और फ़िल्टर होकर साफ पानी घर में बोरिंग अथवा नजदीक के हैंडपम्प के जरिये सीधा जमीन में उतर जाता है. इस मॉडल में महज 16 हजार लागत आती है वही डूंगरपुर में नगर परिषद इस काम के लिए 8 हजार रुपये की सब्सिडी भी देती है. वाटर हार्वेस्टिंग के इस नए मॉडल से डूंगरपुर शहर का भूजल स्तर 20 फीट तक ऊपर आ गया वही पानी मे टीडीएस की मात्रा भी कम हो गई है.

प्रदेश की डूंगरपुर नगरपरिषद के  जल संचय व जल संरक्षण के इस मोडल को राष्ट्रिय स्तर पर सराहा गया. डूंगरपुर नगरपरिषद के इस मोडल को देखने के लिए खुद दिल्ली सरकार के जल मंत्री सत्येन्द्र जैन डूंगरपुर आये थे और जिन्होंने भी इस मोडल को काफी उपयोगी माना और दिल्ली में इस मोडल को लागू करवाने की बात कही. वहीं, जल संचय व जल संरक्षण के काम के लिए डूंगरपुर नगरपरिषद के निवर्तमान सभापति व स्वच्छता के प्रदेश ब्रांड एम्बेसेडर के के गुप्ता का राष्ट्रिय स्तर पर दो बार सम्मान भी हो चूका है. जल संचय व संरक्षण के लिए केंद्र के जल मंत्रालय और वाटर डाइजेस्ट नाम की संस्था ने भी गुप्ता का सम्मान किया है.

आज के भौतिक युग में जल की महत्वत्ता बढ़ गयी है, जिसका कारण हम जमीन के पानी का उपयोग तो कर रहे हैं पर जमीन को कुछ दे नहीं रहे हैं, अगर हम जमीन के पानी का इसी तरह उपयोग करते रहे तो वो दिन दूर नहीं जब इस धरती पर पानी ही नहीं रहेगा. ऐसे में वर्षा के जल को सहेजते हुए भू जल स्तर को बढाने की दिशा में डूंगरपुर नगरपरिषद की पहल काबिले तारीफ़ है. इधर डूंगरपुर नगरपरिषद के इस मोडल की चर्चा अब राजस्थान में भी है और जल्द ही राजस्थान सरकार की एक टीम भी डूंगरपुर आकर इस मोडल को अध्ययन करेगी.

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