राजस्थान: लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की उठी मांग

लोकतंत्र सेनानी संघ के ज्ञापन पर सीएस डीबी गुप्ता ने इन 306 लोगों के पंजीकरण व सम्मान को लेकर हुई कार्रवाई के बारे में 15 सितंबर तक जिला अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है.

राजस्थान: लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देने की उठी मांग
सीआरपीसी की धारा में लोकतंत्र सेनानी को सम्मान दिलाने वाला राजस्थान अकेला राज्य है

जयपुर/भरत राज: आपातकाल के दौरान सीआरपीसी की अलग-अलग धाराओं में 1 माह से बंद व्यक्तियों को लोकतंत्र सेनानियों के दर्जे के लिए नियम तो बदल दिए हैं. लेकिन हालात ये हैं कि इन 306 व्यक्ति अभी भी अपने सम्मान के लिए जिलों में भटक रहे हैं. अब लोकतंत्र सेनानी संघ के ज्ञापन पर सीएस डीबी गुप्ता ने इन 306 लोगों के पंजीकरण व सम्मान को लेकर हुई कार्रवाई के बारे में 15 सितंबर तक जिला अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है. वहीं लोकतंत्र सेनानी अब सुराज संकल्प की घोषणा अनुसार उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों जैसा दर्जा दिलवाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

आपातकाल में लोकतंत्र कायम करने के लिए मीसा, डीआईआर और सीआरपीसी की अलग अलग धाराओं में बड़ी संख्या में व्यक्ति निरुद्ध या जेल में बंद रहे थे. इनके आकलन और जांच के लिए केंद्र सरकार ने जे एस शाह की अध्यक्षता में इस बारे में कमीशन का गठन किया था. इसकी रिपोर्ट अनुसार राजस्थान में मीसा बंदियों की संख्या 542, डीआईआर बंदियों की संख्या 1352 और सीआरपीसी बंदियों की संख्या 1908 बताई गई है.

इस संख्या में वह आंकड़ा भी शामिल है जो मीसा, डीआईआर और सीआरपीसी की अलग अलग धाराओं में 30 दिन से भी कम समय तक जेल में बंद रहे. हालांकि सरकार के मुताबिक प्रदेश में मीसा व डीआईआर बंदियों की संख्या 1050, जबकि सीआरपीसी बंदियों की संख्या 450-500 है.

अभी मीसा व डीआईआर बंदियों को पेंशन, मेडिकल भत्ते की सुविधा मिलती है. इसमें सरकार का 18 करोड़ का बजट है. खबर के मुताबिक पहले इन लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन 12500 थी जो अब बढ़कर 20 हजार हो गई है. वहीं चिकित्सा भत्ता 1250 मिलता था जो बढ़ाकर 4000 कर दिया गया. अब इसमें सीआरपीसी में बंदी व्यक्ति भी जुड़ेंगे. सरकार के मुताबिक इनकी अनुमानित संख्या 500 है.

सरकार के मुताबिक सीआरपीसी के बंदियों को शामिल करने पर पेंशन व चिकित्सा भत्ते का खर्चा 30 करोड़ है. इन्हें रोडवेज सुविधा देने का खर्चा 50 लाख माना गया है. इस तरह कुल 48.50 करोड़ का खर्चा माना गया है.

वहीं लोकतंत्र सेनानी संघ के ज्ञापन पर सीएस डी बी गुप्ता ने जिला अधिकारी को निर्देशित किया है कि 15 सितंबर तक सीआरपीसी की अलग-अलग धाराओं में लोकतंत्र सेनानियों के आवेदन का निस्तारण कर उन्हें पंजीकृत करें और रिपोर्ट दें. इसके बाद उन्हें पेंशन और अन्य सुविधा देने की प्रक्रिया होगी. 

बता दें कि सीआरपीसी की धारा में लोकतंत्र सेनानी को सम्मान दिलाने वाला राजस्थान अकेला राज्य है. लेकिन संघ एमपी की तर्ज पर 1 दिन भी मीसा और डीआईआर में बंद रहे व्यक्तियों को सम्मान दिलाने की मांग कर रहा है. संध के मुताबिक यूपी व एमपी जैसे ही इस सम्मान निधि को लेकर विधेयक बने ताकि दूसरी विचारधारा की सरकार आने पर इन्हें सम्मान मिलना रुक नहीं जाए.

संध की मांग है कि यूपी व एमपी जैसे इन लोकतंत्र सेनानियों की भी राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि हो. सबसे खास मांग सुराज संकल्प के पेज 40 के उस बिंदु की पालना है जिसके तहत लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों का दर्जा दिलाने की बात कही गई है. 

चूंकि विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने में बेहद कम समय बचा है. ऐसे में लोकतंत्र सेनानी अब जल्द से जल्द सरकारी आदेश के क्रियान्वयन और सुराज संकल्प की घोषणा पूरी करवाने के लिए मशक्कत कर रहे हैं.