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सुल्तानपुर के स्वास्थ केंद्र में सुविधाओं के बावजूद मरीजों को नहीं मिल रहा सही इलाज

चिकित्सालय में दूसरी मंजिल पर ऑपरेशन थियेटर बना हुआ है. जहां पर ऑपरेशन थियेटर कक्ष के साथ 2 वार्ड, काउंटर और अन्य सभी कक्ष और संसाधन हैं लेकिन सर्जन के अभाव में ऑपरेशन थियेटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है. 

सुल्तानपुर के स्वास्थ केंद्र में सुविधाओं के बावजूद मरीजों को नहीं मिल रहा सही इलाज
प्रतीकात्मक तस्वीर

सुल्तानपुर: कोटा जिले के सुल्तानपुर कस्बे मे स्थित तहसील क्षेत्र के सबसे बड़े राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को मूलभत चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही हैं. यहां पर्याप्त संसाधन होने के बाद भी चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को गंभीर रोगों के लिए कोटा जाना पड़ता है. हैरानी की बात यह है कि इस अस्पताल में लाखों रूपये से तैयार कराए ऑपरेशन थिएटर में आज तक एक भी प्रसूता की सिजेरियन डिलेवरी तक नहीं कराई गई है. 

सिजेरियन की नौबत आते ही चिकित्सक गर्भवतियों को कोटा रेफर कर देते हैं. चिकित्सालय में यूं तो 6 पुरूष और 5 महिला चिकित्सक कार्यरत हैं. जिनमें एक महिला चिकित्सक कोटा जेकेलॉन चिकित्सालय मे कार्यरत है. ऐसे में भी महिला मरीजों के लिए उपचार के लिए भी परिजनों को चिकित्सालय में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा चिकित्सालय में ब्लड बैंक के लिए पर्याप्त संसाधन है लेकिन अभी तक ब्लड बैंक शुरू नहीं हुआ तो वंही वर्षो से सीएचसी में सोनोग्राफी की मांग पर कोई ध्यान नहीं दे रहा. मशीन के अभाव में मजबूरन महिला मरीजों को 40 किलोमीटर दूर कोटा जाना पड़ता है.

चिकित्सालय में दूसरी मंजिल पर ऑपरेशन थियेटर बना हुआ है. जहां पर ऑपरेशन थियेटर कक्ष के साथ 2 वार्ड, काउंटर और अन्य सभी कक्ष और संसाधन हैं लेकिन सर्जन के अभाव में ऑपरेशन थियेटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्रत्येक बुधवार को चिकित्सालय में नसबन्दी कैम्प होता है इसमें ही ऑपरेशन थियेटर का उपयोग होता है बाकी समय यहां ताला लटका रहता है वंही यहां विगत 9 वर्षों से ऑपरेशन थियेटर के बाहर मरीजों के लिए बने कमरों में ब्लॉक चिकित्सा कार्यालय संचालित हो रहा है. 

तहसील के सबसे बड़े इस अस्पताल में सर्वाधिक परेशानी महिला मरीजों को उठानी पड़ती है. यहां ओपीडी के समय तो जैसे तैसे महिला चिकित्सकों को उपचार मिल जाता है लेकिन रात के समय महिलाओं के लिए उपचार मिलना टेढी खीर साबित हो जाता है. यहां प्रतिदिन चिकित्सालय में एक कम्पाउंडर और एक चिकित्सक की ड्यूटी लगती है लेकिन इसमें रोटेशन के हिसाब से महिला चिकित्सक की ड्यूटी 4 दिन में एक बार आती है. बाकी समय महिलाओं को उपचार के लिए खासी परेशानी उठानी पड़ती है. 

समस्याओं को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अब्दुल मुजीब लाहौरी के नैतृत्व में सीएचसी में मरीजों को होने वाली परेशानी के समाधान और सुविधा विस्तार को लेकर सीएमएचओ कोटा के नाम ब्लाक सीएमएचओ डा. गिरिराज मीणा को 8 सूत्रीय मांगो का ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चिकित्सालय में मरीजो की भीड़ के बावजूद भी एक ही दवा और पर्ची काउंटर होने के कारण मरीजों को होने वाली परेशानी के मध्यनजर दो-दो परची और दवा काउंटर बनवाने की मांग की. इसके अलावा सीएचसी मे मरीजों की पर्याप्त सुविधाएं दिए जाने की भी मांग की.