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जयपुर: देवस्थान विभाग जमकर वसूलता है किराया, लेकिन नंदोत्सव के लिए है पैसे का संकट

जयपुर के कई मंदिरों से काफी राजस्व मिलने के बावजूद देवस्थान विभाग ने कृष्णजन्मोत्सव और अन्य कार्यक्रमों के लिए नाममात्र की धनराशि उपलब्ध कराई.

जयपुर: देवस्थान विभाग जमकर वसूलता है किराया, लेकिन नंदोत्सव के लिए है पैसे का संकट
आवंटित धनराशि जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: प्रदेश में सरकार बदलने के बाद धार्मिक परंपराओं पर विराम सा लगता दिख रहा है. जन्माष्टमी और नंदोत्सव पर जहां निजी कृष्ण मंदिरों में धूम रहती है. लेकिन देवस्थान विभाग से जुड़े मंदिरों में जन्माष्टमी जन्मोत्स्व के लिए मिलने वाली राशि को जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

देवस्थान विभाग ने जयपुर में राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार के 30 मंदिरों के लिए 17 हजार 100 रूपए का बजट जारी किया है. जिसमें 9 मंदिरों को 120 रूपए, 5 मंदिरों को 1200 रूपए, 5 मंदिरों को 900 रूपए और 11 मंदिरों को 600 रूपए के हिसाब से बजट जारी किया गया है. 

4 मंदिरों को मिले 600 रुपए
वहीं, राजकीय आत्मनिर्भर श्रेणी के 4 मंदिरों को 600 रूपए के हिसाब से बजट जारी किया गया है. इस बजट में मंदिर पुजारियों को कृष्ण जन्माष्टमी पर सजावट से लेकर प्रसाद और दूसरे दिन नंदोत्सव मनाना होगा. 

नंदोत्सव के लिए करना पड़ता है चंदा
बता दें, रियासत काल में इन मंदिरों में नंदोत्सव के लिए पुण्यभाता विभाग की ओर से अलग से बजट दिया जाता था. लेकिन अब इन मंदिरों के लिए कोई राशि नहीं दी जाती है. जिस कारण भक्त और पुजारी अपने स्तर पर कुछ करने की स्थिति में होते हैं. तभी नंदोत्सव मनाना संभव हो पाता है. जन्माष्टमी के दूसरे दिन दोपहर में मंदिरों में नंदोत्सव मनाया जाता है. इसमें भगवान के शृंगार के बाद बधाई गान एवं श्रद्धालुओं को उछाल लुटाई जाती है. लेकिन इसके लिए विभाग की ओर से बजट की कोई व्यवस्था नहीं है. जिस कारण इसका पूरा खर्चा भक्त व पुजारी मिलकर उठाते हैं.

दो दशक से नहीं उपलब्ध कराए ठाकुरजी का पोशाक
देवस्थान विभाग ने अपने अधीन मंदिरों में भगवान के लिए पोशाक उपलब्ध कराए दो दशक से अधिक समय बीत गया है. इन मंदिरों में पुजारी को अपने स्तर पर ठाकुरजी के लिए पोशाक की व्यवस्था करनी पड़ती है.

जानकारों के अनुसार जन्माष्टमी पर 31 लीटर दूध, 6 किलो धनिया, 6 किलो बुरा, घी, शहद, सुगंधित दृव्य, नवीन पोशाक, फूलों की सजवाट, भजन मंडली आदि पर 20 हजार रुपए का खर्च होता है.

इतने मंदिर विभाग के अधीन
देवस्थान विभाग के अधीन राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी में जयपुर में 23 कृष्ण एवं उनके स्वरूपों के मंदिर हैं. इनमें ब्रजनिधिजी, आनंद कृष्ण बिहारीजी और ब्रजराज बिहारीजी तीन मंदिर ए श्रेणी एवं बाकी दूसरी श्रेणी के मंदिर है. विभाग को इन मंदिरों से राजस्व के रूप में हजारों रुपए महीना किराया भी मिलता है.