Rajasthan में Tax चारों पर जांच एजेंसियां का शिकंजा, DGGI ने 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार

राजस्थान में टैक्स चारों पर जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई है. इनकम टैक्स के आद अब डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (Director general of GST intelligence) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है. 

Rajasthan में Tax चारों पर जांच एजेंसियां का शिकंजा, DGGI ने 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार
फाइल फोटो

जयपुर: राजस्थान में टैक्स चारों पर जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई है. इनकम टैक्स के आद अब डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (Director general of GST intelligence) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है. प्रदेश में फर्जी इनवॉइस रैकेट (Fake invoice racket) का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने 1004 करोड़ की फर्जी इनवॉइस जारी कर 146 करोड़ की फर्जी आईटीसी क्लेम उठाया. अब सभी फर्मों की जांच कड़ाई से हो रही है.

डीजीजीआई (DGGI) ने जयपुर में फर्जी बिल जारी कर आईटीसी क्लेम उठाने वाले लोगों पर शिकंजा कसा है. आसूचना पर हुई कार्रवाई में विष्णु गर्ग निवासी वैशाली नगर, मैसर्स विकास ट्रेडिंग कंपनी, मैसर्स श्री श्याम ट्रेडर्स, मैसर्स विनायक एसोसिएट्स, मैसर्स एस पी इंटरप्राइजेज, मैसर्स वी के इंडस्ट्रीज एंड कारपोरेशन के खिलाफ जांच शुरू की गई थी. जांच में सामने आया की विष्णु गर्ग ने माल की आपूर्ति के बिना नकली चालानों को जारी किया है और इस तरह के चालान पर आईटीसी; इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया.

विष्णु गर्ग के पास इसके अलावा 20 अन्य फर्म भी पाई गई जो फर्जी बिलों को जारी कर रही थी. प्रारंभिक जांच में यह तथ्य उजागर हुए है कि विष्णु गर्ग ने सीजीएसटी अधिनियमए 2017, आरजीएसटी अधिनियम  2017,  आईजीएसटी अधिनियम 2017 और उसके नियमों से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन किया है. विष्णु गर्ग के ऑफिस से बड़ी संख्या में दस्तावेज पाए गए हैं.

इन 25 फर्मों को जीएसटी के तहत और जीएसटी से पहले वैट के तहत भी बनाया गया था. इन नकली चालान में शामिल कुल मूल्य 1004.34 करोड़ रुपये  है, जिसमे कुल आईटीसी 146.08 करोड़ शामिल हैं. आरोपी विष्णु गर्ग इन सब फर्जी बिलों के जारी करने में मास्टरमाइंड था और उसने कुल 200 फर्मों को चालान जारी किए. यह फर्मे राजस्थान, मध्यप्रदेश और तेलंगाना और अन्य राज्यों में स्थित हैं. उन्होंने मुख्य रूप से टिम्बर, स्क्रैप, प्लाईवुड और गोल्ड आदि के संबंध में बिल जारी किए. अब तक की जांच में पता चला है कि आरोपी ने इन फर्मों को माल की वास्तविक आपूर्ति के बिना फर्जी चालान के आधार पर आईटीसी लाभ दिलवाया.

डीजीजीआई ने विष्णु गर्ग,,बद्री लाल माली, और महेंद्र सैनी और सीए भगवान सहाय गुप्ता को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत किए गए अपराधों के लिए सीजीएसटी अधिनियम 2017 की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया. डीजीजीआई हालिया इनकम टैक्स छापों में भी जीएसटी चोरी की आंशकों पर कार्रवाई करेगी.

प्रदेश में काला धन कमाने वालों पर आयकर विभाग के बाद डीजीजीआई की ताबड़तोड़ कार्रवाईयों से हडकंप मचा हुआ है. आने वाले दिनों में टैक्स एजेंसियां कुछ ओर बड़े नामों पर कार्रवाई कर सकती है.

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