धौलपुर: कभी खुद की बेटी की शादी के लिए नहीं थे पैसे, अब करवाते हैं बेसहारा लड़कियों की शादी

इस बार भी 16 फरवरी को तीर्थराज मचकुण्ड परिसर में 51 जोड़ों की शादी करवाएगा. इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है. इस सर्व धर्म शादी समारोह में 51 जोड़ों की शादी होने जा रही है.

धौलपुर: कभी खुद की बेटी की शादी के लिए नहीं थे पैसे, अब करवाते हैं बेसहारा लड़कियों की शादी
वह, धौलपुर में हर साल तीर्थराज मचकुण्ड में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करते हैं.

धौलपुर: आर्थिक तंगी के कारण कभी अपने ही परिवार की लड़की की शादी नहीं हो पा रही थी. यहां तक कि इस परिवार के पास कभी लड़का तलाशने के लिए पैसे तक नहीं थे. वहीं, अब यह परिवार निर्धन युवतियों का ब्याह करा रहा है. अब तक यह परिवार राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों की 196 युवतियां का विवाह करा चुका है. 

इस बार भी 16 फरवरी को तीर्थराज मचकुण्ड परिसर में 51 जोड़ों की शादी करवाएगा. इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी है. इस सर्व धर्म शादी समारोह में 51 जोड़ों की शादी होने जा रही है. जिनमें 29 लड़किया ऐसी है जो अनाथ है. इस शादी समारोह में 41 हिन्दू जोड़ों 6 मुस्लिम और 4 सिख समाज धर्म की लड़कियों के विवाह संपन्न होंगे. 

खुद लेकर जाते हैं शगुन 
अनिल अग्रवाल ने बताया जब रिश्ता तय हो जाता है तो लड़की वालों की तरफ से लड़के वालों के यहां शगुन देने का सामान लड़की के घर पहुंचा जाते हैं, जिससे वह अपने संस्कार निभा सकें.

वह, धौलपुर में हर साल तीर्थराज मचकुण्ड में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित करते हैं. जिसमें स्वर्णाभूषण से लेकर हर जरूरत का सामान (करीब दो लाख रुपए का) दिया जाता है, जिससे जिंदगी गुजर-बसर कर सके. अधिकांशतर वे लड़कियां इस सामूहिक विवाह समारोह में जो अनाथ और डांग क्षेत्र की है. जिनमे करौली, मण्डरायल, श्योपुर, शिवपुरी, मासलपुर, गुबरेडा, करौली, भमपुरा धौलपुर, श्यामपुर, कसेड़, कैलादेवी, रघुनाथपुरा, ग्वालियर सहित दर्जन भर जिलों के गांवों की युवतियां शामिल हैं. इनमें अधिकांश अनाथ हैं. 

जंगलों में तलाशते हैं निर्धन युवतियां 
शादी विवाह आयोजक अनिल अग्रवाल ने बताया कि धनतेरस के दिन से दिन-रात जंगलों व गांवों में पैदल घूमकर अंतिम छोर पर रहने वाली युवतियां, जिसके विवाह की कोई उम्मीद नहीं होती है, ऐसी युवतियां को तलाश करते हैं. अच्छा लडक़ा तलाशने के लिए किराए आदि के लिए राशि के साथ तीन माह का समय देते हैं. एक मोबाइल देते है, जिससे लगातार मॉनिटरिंग करते हैं. वहीं, शादी में दिए जाने वाले उपहार की सूची देते हैं. जिससे पक्के मकान व अच्छे घर का लड़का मिल जाए. 

मूलत: धौलपुर निवासी अनिल के पिता स्वर्गीय नारायण दास फाकाकशी में आगरा चले गए थे. जहां पेठे की दुकान लगाने के दौरान एक मात्र रजाई भी आग में जल गई. इस पर पूरी सर्दी दम्पती बोरी ओढ़कर सोए थे. वहीं, बहिनों की शादी के लिए पैसा नहीं होने की टीस दिल में चुभती रही, इस पर उन्होंने अपने चारों पुत्रों की शादी मंदिर में बिना दहेज की थी. साथ ही, प्रेरणा दी कि ऐसों की मदद करों, जिनके पास सर्दी में ओढऩे को नहीं हो, जिसकी शादी में दिक्कत आ रही हो. अब चारों पुत्र बर्तन, ज्वैलर्स का काम है, वे हर साल ऐसी युवतियों की शादी करते हैं.