धौलपुर: बेटियों की उड़ान के लिए आगे आए ग्रामीण, शिक्षा के लिए उठाया बड़ा कदम

धौलपुर जिले के मौरोली ग्राम पंचायत के बरैलापुरा गांव में 2008 से पहले पांचवी कक्षा से आगे की पढ़ाई नहीं होने से अधिकांश गांव की बेटियां आगे की शिक्षा लेने से वंचित रह जाती थीं. 

धौलपुर: बेटियों की उड़ान के लिए आगे आए ग्रामीण, शिक्षा के लिए उठाया बड़ा कदम
स्कूल में अब 12वीं कक्षा तक करीब 178 से अधिक बेटियां शिक्षा ले रही हैं

धौलपुर: धौलपुर जिले के मोरोली ग्राम मे ग्रामीणों ने स्कूल के लिए डेढ़ बीघा जमीन दान की है. दरअसल. पांचवीं से आगे पढ़ने के गांव में स्कूल नहीं था. लेकिन शिक्षा के प्रति बेटियों का लगाव देखा तो गांव के चार लोगों ने मिलकर डेढ़ बीघा जमीन स्कूल के लिए दान दे दी. जिसके बाद मौरोली ग्राम पंचायत के 28 पुरा के बरैलापुरा गांव में 12वीं तक का इकलौता स्कूल बना है. जिसके बाद अब गांव में ही 178 बेटियां 12वीं तक शिक्षा ले रही हैं.

जानकारी के अनुसार, धौलपुर जिले के मौरोली ग्राम पंचायत के बरैलापुरा गांव में 2008 से पहले पांचवी कक्षा से आगे की पढ़ाई नहीं होने से अधिकांश गांव की बेटियां आगे की शिक्षा लेने से वंचित रह जाती थीं. वजह, ग्राम पंचायत के बरैलापुरा गांव के स्कूल में जगह नहीं थी. जिसकी वजह से स्कूल को पांचवी के आगे तक नहीं बढ़ाया जा सकता था. वहीं, पांचवीं से आगे की पढ़ाई के लिए ग्रामीण बेटियों को पढ़ने के लिए 10 कि.मी दूर शहर तक नहीं भेजते थे. ऐसे में गांव की अधिकांश बेटियों की पढ़ाई सिर्फ पांचवीं कक्षा तक ही हो पाती थी. और फिर उन्हें घर में ही बैठना पड़ता था.

लेकिन गांव में शिक्षा के प्रति बेटियों का लगाव देखकर ग्रामीण दौलत राम, भरत सिंह, गनेशीलाल और रामबाबू ने बेटियों को शिक्षित करने और बेटियों के पंखों को उड़ान देने के लिए अपनी करीब डेढ़ बीघा जमीन स्कूल को दान दे दी. जिसके बाद बरैलापुरा गांव में दान में दी गई जमीन में स्कूल को पहले 8वीं कक्षा तक किया गया.  इसके बाद इसी स्कूल को 12वीं तक कर दिया गया.

स्कूल प्रधानाचार्य बबीता पाराशर के मुताबिक स्कूल में अब 12वीं कक्षा तक करीब 178 से अधिक बेटियां शिक्षा ले रही हैं. साथ ही ग्रामीण अब बेटियों को आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेजों में भेजने लगे हैं. राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बरैलापुरा में 12वीं तक स्कूल होने से गांव के बच्चे अब गांव में ही 12वीं तक की शिक्षा ले रहे हैं. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए स्टूडेंट्स कॉलेजों में भी आ रहे हैं.

प्रधानाचार्य बबीता पाराशर के अनुसार बरैला गांव में बने स्कूल में करीब 18 बेटियां 2 कि.मी दूर के गांव से पढ़ने के लिए रोजाना स्कूल आती हैं. 18 बेटियों को प्रतिदिन 15 रुपए के हिसाब से ट्रांसपोर्ट वाउचर भी दिया जाता है. इसके अलावा कक्षा एक से लेकर कक्षा 8 तक के सभी बच्चों को मिड-डे-मील मीनू के हिसाब से अलग-अलग दिन उपलब्ध करवाया जाता है.

जानकारी के मुताबिक, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बरैलापुरा में 8 कमरे बने हुए हैं, जबकि 6 कमरे निर्माणाधीन हैं. स्कूल में कंप्यूटर लैब की भी व्यवस्था है. जिससे छात्रों को एक घंटे प्रतिदिन कंप्यूटर का अभ्यास भी कराया है.