नागौर: हौंसलों से उड़ान पर दिव्यांग शिवराज, प्रतिभाओं को निखारने के लिए कर रहा कुछ ऐसा...

निशानेबाज शिवराज की बदौलत अब क्षेत्र के किसानों के बच्चों के हाथ में हल के साथ राइफल भी देखने का मिल रही है.  

नागौर: हौंसलों से उड़ान पर दिव्यांग शिवराज, प्रतिभाओं को निखारने के लिए कर रहा कुछ ऐसा...
हौंसलों से उड़ान पर दिव्यांग शिवराज. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हनुमान तंवर/नागौर: 'मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसले से उड़ान होती है.' राजस्थान के मेड़ता सिटी के दिव्यांग शिवराज सांखला ने इसे अपने जीवन में समझा और सफलता की कहानी को सही साबित कर दिया. जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद जिंदगी जीने का मकसद तय किया और आज उसने घर-घर निशानेबाज तैयार करने का संकल्प लिया है.

निशानेबाज शिवराज की बदौलत अब क्षेत्र के किसानों के बच्चों के हाथ में हल के साथ राइफल भी देखने का मिल रही है. नागौर के मेड़ता सिटी के रहने वाले शिवराज को अपनों की अंगुली तो मिली मगर दोनों पैर से दिव्यांग होने के कारण चलना नसीब नहीं हो सका. छोटी में उम्र पर पिता का साया भी उठ गया जिसके कारण दुखों का पहाड़ टूट गया. 

शिवराज ने अपनी दिव्यांगता को नजरअदांज करते हुए जिदंगी जीने का मकसद तय किया और अपने गांव से 80 किलोमीटर दूर अजमेर शहर में निशानेबाजी का दो साल प्रशिक्षण लिया. इसके बाद चार बार राष्ट्रीय व राज्य स्तर पैराशूटिंग प्रतियोगिता में भाग लेकर गोल्ड, रजत व कास्त पदक जीते.

भारतीय पेराशूटिंग टीम के टॉप 10 के शूटर है शिवराज ने अपने गांव में मारवाड शूटिंग एकेडमी खोलके ऐसे सैंकड़ों निशानेबाज तैयार कर रहा, जो आगामी दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर निशानेबाजी की छाप छोड़ेंगे. कस्बे के आस-पास के करीब सैंकड़ों गांव से आए बच्चों के लिए प्ररेणास्त्रों बने शिवराज का बस अब एक ही सपना है ग्रासरूट की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वो जगह मिले जो वो खुद हासिल नहीं कर सके.

हालांकि, निशानेबाज शिवराज खुद ओलंपिक में भाग लेने का प्रयास कर रहा है. इससे पहले शिवराज का 2019 में भारतीय पैराशूटिंग में चयन हुआ था लेकन  स्पांसरशिफ नहीं मिलने के के कारण शारजाह में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय पैराशूटिंग विश्व कप में भाग नहीं ले सका. क्योंकि सरकार टॉप तीन को ही प्रतियोगिता में भेजती है. बाकी निशानेबाजों को अपने स्तर पर जाना पड़ता है. लेकिन शिवराज ने हिम्मत नहीं हारी है और उनका सपनों का प्रयास जारी है.

Sujit Kumar Srivastav, News Desk