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उदयपुर के हॉस्पिटल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, शहर में बढ़े नशाखेरी के मामले

महाराणा भूपाल हॉस्पिटल के मनोरोग विभाग में गत दो वर्षो में करीब साढ़े तीन हजार मरीज नशे के मामले में भर्ती हो चुके हैं, जो नशे की बोतल में डूब इस बीमारी की ओर बढ़ रहे है.

उदयपुर के हॉस्पिटल की रिपोर्ट में हुआ खुलासा, शहर में बढ़े नशाखेरी के मामले
दो हजार से अधिक मरीज अभी भी दवाई ले रहे है

धीरज रावल/उदयपुर: आज का युवा बड़ी तेजी से नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है. इस बात को हाल में आई कई रिपोर्ट से साबित हो चुका है. युवाओं की ये ऐसी लत जो उन्हें मानसिक रोग जैसे खतरनाक दलदल में धकेल रहीं है. आज का युवा नशे को अपने एक शौक को लेकर करता हुआ उसे अपनी आदत बना चुका है. आपको बता दे कि आज की युवा पीढ़ी में नशा एक युवाओं के लिए पहली पसंद बनता नजर आ रहा है.

ऐसे ही कुछ हालात उदयपुर में भी नजर आने लगे हैं, जहां के महाराणा भूपाल हॉस्पिटल के मनोरोग विभाग में गत दो वर्षो में करीब साढ़े तीन हजार मरीज नशे के मामले में भर्ती हो चुके हैं, जो नशे की बोतल में डूब इस बीमारी की ओर बढ़ रहे है. हाल ये है कि इनमें से दो हजार से अधिक मरीज अभी भी दवाई ले रहे है, लेकिन कुछ मरीज जो दवा छोड फिर शराब घूंट गटकने लगे है. शराब के नशे में मौत को मुंह लगा बैठते है. मनोरोग बीमारियों की भाषा में इसे एल्कोहल डिपेंडेंस का नाम दिया गया है.

प्रतिदिन आ रहे हैं पांच मरीज
मनोरोग विभाग में इन दिनों भी लगातार ऐसे पांच मरीज आ रहे है जो शराब सहित अफीम, तम्बाकू, चरस जैसे नशे के आदि हो चुके हैं. चिकित्सकों का कहना है कि आने वाले मामलों की जांच में सामने आया है कि ज्यादातर युवा पहले शराब को दोस्तो व परिवार के माहौल में फंसकर पीने लगता है. बाद में वह धीरे-धीरे इसका आदि हो जाता है. 

डॉक्टरों की मानें तो आदतन शराबखोरी के कारण युवा लगातार शराब पीने की मात्रा बढ़ाने लगता है, लेकिन बाद में जैसे ही किसी दिन उसे शराब नहीं मिलती तो उसका जी मचलने, घबराहट ओर बैचेनी होने की परेशानी सामने आने लगती है. ऐसे मे वह सोचता है कि उसे जो आराम मिल रहा है वह शराब से मिल रहा है. इस स्थिति में वह खूब शराब पीने लगता है. जब तक परिवार को पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है.
 
मनोरोग विभाग के मुताबिक परिवार वाले जिन मरीजों को अस्पताल इलाज के लिए लेकर आते है उनमें से ज्यादातर एल्कोहल डिपेंडेंस के मामले है. वे इस नशे की गिरफ्त में आ चुके है. करीब 60 प्रतिशत मरीजों को दवा से राहत मिल रहीं है तो अब भी 40 प्रतिशत युवा ऐसे है जो दवा छोडकर फिर से शराब पीने लगते है. इसमें दो प्रकार की दवा मरीज को दी जाती है. इसमें पहले पहले प्रकार की दवा ऐसी होती है जो शराब छोडने के लिए दिया जाता है, तो दूसरे प्रकार की दवा से नशे के आदि हो चुके व्यक्ति के शरीर में होने वाले परिवर्तन को नियंत्रित किया जाता है.