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राजस्थान कांग्रेस में फिर दिखी तकरार, राजीव गांधी की 75वीं जयंती पर हुआ कुछ ऐसा

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद दोनों नेताओं की तरफ से रिश्ते सामान्य दिखाने की कोशिशें की जा रही थी. लेकिन मंगलवार को पीसीसी में एक समारोह में एक बार फिर से दोनों नेताओं के बीच का द्वंद सामने आया. 

राजस्थान कांग्रेस में फिर दिखी तकरार, राजीव गांधी की 75वीं जयंती पर हुआ कुछ ऐसा
पीसीसी में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75 वीं जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

जयपुर: राजस्थान कांग्रेस में 2 पावर सेंटर है यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है. एक खेमा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का है तो दूसरा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट का है. विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान दोनों ही नेताओं की ओर से गाहे-बगाहे सार्वजनिक मंचों पर एक दूसरे पर बिना नाम लिए टिप्पणियां सामने आती रही थीं. लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद दोनों नेताओं की तरफ से रिश्ते सामान्य दिखाने की कोशिशें की जा रही थी. लेकिन मंगलवार को पीसीसी में एक समारोह में एक बार फिर से दोनों नेताओं के बीच का द्वंद सामने आया. 

मौका था पीसीसी में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75 वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम का जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जहां अपने संबोधन में राजीव गांधी के साथ खुद के संस्मरण के जरिए एक नेता के तौर पर उनकी काबलियत का जिक्र किया. वहीं सचिन पायलट ने अपने संबोधन में सीएम को विधायकों और कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान करने की नसीहत दे डाली.

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में राजीव गांधी के साथ के अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि जब वह पार्टी के नेता के तौर पर जोधपुर आए थे तब उनका जोरदार स्वागत किया गया था. मंच से उन्होंने जोधपुर में पानी के संकट के समाधान के लिए मांग करते हुए इंदिरा गांधी कैनाल से जोड़ने की मांग की थी. इस पर राजीव गांधी ने उनकी मांग पर मंच से ही घोषणा की. इस तरह की कई घटनाएं हैं जो बताती हैं कि राजीव गांधी कितने बड़े नेता हैं. इतना ही नहीं जब यह प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग पीएमओ से ही करवाई थी. अशोक गहलोत किस बात पर सचिन पायलट का जवाब सुनाने से पहले आपको दिखाते हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने क्या कहा था.

जवाब में सचिन पायलट ने अशोक गहलोत की इसी बात का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से एक बड़े नेता के तौर पर राजीव गांधी ने अशोक गहलोत की मांग पर जोधपुर की समस्या का समाधान किया था वैसे ही अशोक गहलोत को भी अपने विधायकों की बात सुननी चाहिए. उन्हें बिना डीपीआर के विधायकों के कामों की घोषणा करनी चाहिए. सचिन पायलट यहीं नहीं रुके उन्होंने राजीव गांधी के मुंबई अधिवेशन में दिए गए बयान का भी हवाला दिया कहा मुंबई अधिवेशन में राजीव गांधी ने कहा था कि अगर कांग्रेस पार्टी में भी दलाल हैं तो उन्हें बाहर किया जाना चाहिए. 

सचिन पायलट ने कहा कि राजीव गांधी ने सिस्टम को पारदर्शी बनाने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भावना को तवज्जो देने की कोशिश हमेशा की थी. राजीव गांधी कहते थे कि सत्ता आती-जाती रहती है लेकिन संगठन मजबूत होना चाहिए सचिन पायलट ने कहा कि राजीव गांधी के इन्हीं विचार और आदर्शों को हमें मध्य नजर रखना होगा राजस्थान में हमें पार्टी के कार्यकर्ताओं नेताओं की भावना का ख्याल रखना चाहिए.

कांग्रेस के इस कार्यक्रम में दोनों नेताओं के बीच चले इन शब्द बाणों से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हैरान थे. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राजस्थान में कांग्रेस के सामने आने वाले निकाय और पंचायत चुनाव बड़ी चुनौती है. लेकिन जिस तरह से दोनों नेताओं के बीच आज जुबानी जंग हुई है उसे कई सवाल खड़े हो गए हैं. चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए सत्ता और संगठन का तालमेल बेहद जरूरी है लेकिन वर्तमान हालातों में ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है.