एलडीसी भर्ती 2018 का पीछा नहीं छोड़ रहे विवाद, 2700 अभ्यर्थी खा रहे दर-दर की ठोकरे

एलडीसी भर्ती 2018 और विवादों का नाता है कि छूटता हुआ नजर ही नहीं आ रहा. 

एलडीसी भर्ती 2018 का पीछा नहीं छोड़ रहे विवाद, 2700 अभ्यर्थी खा रहे दर-दर की ठोकरे
फाइल फोटो

जयपुर: एलडीसी भर्ती 2018 और विवादों का नाता है कि छूटता हुआ नजर ही नहीं आ रहा. भर्ती परीक्षा के बाद पहले परिणाम और उसके बाद नियुक्ति की मांग को लेकर लम्बे आंदोलन और विवाद देखने को मिले.उस के बाद 587 पदों को कम करने के मामले में मुख्यमंत्री तक को हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन नियुक्ति के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है और वो है परिवेदना निस्तारण का, जिसे दूर करने की मांग को लेकर करीब 2700 नियुक्ति प्राप्त अभ्यर्थी दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं.

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प्रदेश में पहली बार एलडीसी के 12 हजार से ज्यादा पदों पर 2018 में भर्ती निकाली गई, लेकिन विज्ञप्ति से लेकर नियुक्ति तक ये भर्ती विवादों में ही अटकी रही. कोरोना काल में लॉक डाउन के बीच गहलोत सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए करीब 12 हजार बेरोजगारों को नियुक्ति का तोहफा दिया. यहां तक की लॉक डाउन के दौहान ही इनके जिला आवंटन आदेश जारी हुए. भर्ती को लेकर पहले एआरडी द्वारा जिला आवंटन किया गया, लेकिन बाद में इसको रद्द करते हुए जिला आवंटन की जिम्मेदारी विभागों को सौंपी और जैसे ही विभागों ने जिला आवंटन किए मानो शिक्षा विभाग में परिवेदनाओं की एप्लीकेशन की बाढ़ सी आ रही.

विभागों द्वारा जिला आवंटन की सबसे बड़ी खामी देखने को मिली की गृह जिले में पद होने के बाद भी करीब 500 से 700 किलोमीटर तक अभ्यर्थियों को जिला आवंटित किया गया. जिला आवंटन को लेकर जब परिवेदना मांगी गई तो, सबसे ज्यादा करीब 3 हजार परिवेदना शिक्षा विभाग को प्राप्त हुई. इनमें से महज 238 परिवेदना का निस्तारण हो पाया है,,परिवेदना निस्तारण के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. घरों से दूर नियुक्ति प्राप्त लोगों का कहना है कि "एआरडी द्वारा जब जिला आवंटन किया गया तो मेरिट के आधार पर गृह जिला दिया गया, लेकिन जब विभागों ने जिला आवंटन किया तो घरों से 500 से 700 किलोमीटर दूर तक नियुक्ति दी गई. जबकि हमारे गृह जिले में पद खाली पड़े हैं,,ऐसे में महज 13 हजार रुपये की आय में रहना और घर खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है."

प्रोबेशन काल में नियुक्ति प्राप्त लोगों को 13 हजार रुपये का वेतन दिया जा रहा है और इतने अल्प वेतन में घरों से दूर नियुक्ति मिलने से करीब 2700 लोग परेशान हो रहे हैं. अलवर के राजाराम और जयपुर के हनुमान गुर्जर का कहना है कि "बड़े ही आर्थिक संकट से गुजर कर परिवार ने नौकरी लगाया है और जब नियुक्ति की बारी आई तो परिवार पर और बोझ बन गए. दूरस्थ जिलों में नौकरी मिलने की वजह से 13 हजार में घर खर्च नहीं चल पा रहा है. यहां तक की घर से ही पैसे लेने पड़ रहे हैं. साथ ही बुजुर्ग मां-बाप का भी ध्यान रखने में परेशानी हो रही है." 

बहरहाल, जब नियुक्त कर्मचारियों ने पीड़ा शिक्षा मंत्री तक पहुंचाई,,तो जल्द निस्तारण का आश्वासन दिया, लेकिन अब परिवेदना सूची जारी होने के बाद इनकी समस्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में एक बार फिर से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हस्तक्षेप कर हजारों कर्मचारियों को राहत देने की गुहार लगाई है.

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