पितृ पक्ष के दिनों में करें ये उपाय, प्रसन्न होंगे पूर्वज, जीवन में आएगी खुशहाली

 प्रत्येक सनातन धर्म के मानने वाले व्यक्ति को अपने पूर्वजों की पूजा-उपासना श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष में करनी चाहिए.

पितृ पक्ष के दिनों में करें ये उपाय, प्रसन्न होंगे पूर्वज, जीवन में आएगी खुशहाली
प्रत्येक सनातन धर्म के मानने वाले व्यक्ति को अपने पूर्वजों की पूजा-उपासना श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष में करनी चाहिए.

जयपुर: श्राद्ध अपने पूर्वजों की उपासना करने का पर्व है. इस वर्ष 02 सितंबर से शुरु हो चुके हैं और 17 सितंबर तक चलेंगे. ज्योतिषाचार्य और वैदिक कर्मकांड के विशेषज्ञ डॉ. मिथिलेश पांडेय के अनुसार, प्रत्येक सनातन धर्म के मानने वाले व्यक्ति को अपने पूर्वजों की पूजा-उपासना श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष में करनी चाहिए.

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पितृ पक्ष जो कि हर वर्ष आश्विन महीने की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक के समय को माना जाता है और भादपद्र पूर्णिमा को पूर्णिमा का श्राद्ध होता है. प्रत्येक व्यक्ति को इस महीने अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी और पिछली सात पीढ़ियों का श्राद्ध कर्म अवश्य करना चाहिए. इसके अलावा अकाल मृत्यु और गर्भ में मृत हो चुके बच्चे का श्राद्ध भी किया जाना चाहिए. श्राद्ध कर्म में तर्पण, ब्राह्मण भोजन और दान का बहुत अधिक महत्व है. इसमें देव तर्पण, ऋषि तर्पण और पितृ तर्पण का बेहद महत्व है.

देव तर्पण दोनो हाथ की उंगलियों के माध्यम से जल को पूर्व दिशा मे शुद्ध स्थान पर अर्पित किया जाता है. पितृ तर्पण अंजलि में लेकर दाहिनी हाथ के अंगूठे के सहारे शुद्ध स्थान पर जल अर्पित जाता है और ऋषि तर्पण में भी दोनों हाथो की अंजलियों के सहारे जल शुद्ध स्थान पर अर्पित किया जाता है. तीनों ही प्रकार के तपर्ण में हाथों में तिल, जौ, कुशा और चावल लेकर जल के माध्यम से उनको शुद्ध भूमि पर अर्पित किया जाता है.

तर्पण करने के बाद यथा सामर्थ्य दान, वस्त्र, अन्न और पेय पदार्थ का दान करना चाहिए. पितरों के निमित्त किया गया दान वंश में बढ़ोतरी, घर में सुख शांति, धन आगमन और खुद की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है. वेदों के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक जो श्राद्ध के दिन हैं इन दिनों प्रतिदिन पितरों के लिए तर्पण करें लेकिन अगर रोज तर्पण करना संभव न हो तो पूर्वज की मृत्यु जिस भारतीय तिथि को हुई है, उस दिन उनका श्राद्ध करें लेकिन यदि तिथि की जानकारी नहीं है तो अमावस्या के दिन श्राद्ध किया जा सकता है.

इसके अलावा पितृ पक्ष के दिनों में नए काम का शुभारंभ, नई वस्तु, कपड़ों आदि की खरीदारी नहीं करनी चाहिए. संभव हो तो जीवन में एक बार गया जाकर पितरों का पिंडदान अवश्य करना चाहिए.