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राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश, 18 रियासतों की संपत्तियों के बंटवारे की सूची जारी करे सरकार

याचिका में कहा गया है कि संपत्ति की इस सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया है. जिसके चलते संपत्तियों के स्वामित्व का निपटारा संभव नहीं है.

राजस्थान हाई कोर्ट का आदेश, 18 रियासतों की संपत्तियों के बंटवारे की सूची जारी करे सरकार
फाइल फोटो

महेश पारीक, जयपुर: प्रदेश की 18 रियासतों की संपत्तियों के बंटवारे को लेकर केन्द्र सरकार के साथ हुए समझौते के दौरान बनाई संपत्तियों की सूचियां गायब हो गई हैं. राजस्थान हाईकोर्ट भी वर्ष 2015 में आदेश जारी कर इस सूची को सार्वजनिक करने के आदेश दे चुका है. वहीं हाईकोर्ट ने एक बार फिर पूर्व में दिए आदेश की पालना में चार सप्ताह में सूची को सार्वजनिक करने को कहा है. 

मुख्य न्यायाधीश एस रविन्द्र भट्ट और न्यायाधीश इन्द्रजीतसिंह की खंडपीठ ने यह आदेश लोक संपत्ति संरक्षण समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए. हालांकि केन्द्र सरकार पहले ही हाईकोर्ट में कह चुका है कि उनके पास कोविनेंट की सिर्फ प्रिटेंड कॉपी ही है. ऑरिजनल कॉपी सत्यापन के लिए राज्य सरकार को कई दशकों पहले ही भेजी जा चुकी है. वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ऐसी कोई भी कॉपी उनके पास होने से इंकार कर चुका है.

लोक संपत्ति संरक्षण समिति से जुड़े पीएन मैंदोला ने वर्ष 2015 में याचिका पेश कर कहा कि राजस्थान गठन के दौरान प्रदेश की तत्कालीन 18 रियासतों और सरकार के बीच वर्ष 1949 में संपत्तियों के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था. इसके तहत कुछ संपत्तियों को तत्कालीन रियासतों की मानते हुए शेष संपत्तियों का स्वामित्व सरकार को दिया गया था. 

याचिका में कहा गया है कि संपत्ति की इस सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया है. जिसके चलते संपत्तियों के स्वामित्व का निपटारा संभव नहीं है. रिकॉर्ड नहीं होने के चलते केन्द्र सरकार को दी गई कई संपत्तियों पर अब भी पूर्व राजपरिवार के लोग काबिज हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी दलील दी जा चुकी है कि मूल समझोता और सूची दोनों ही दस्तावेज गायब हो चुके हैं. 

केन्द्र सरकार के पास सूची राज्य सरकार को भेजने की रसीद मौजूद है, लेकिन राज्य सरकार के पास सूची को लेकर कोई रिकॉर्ड ही नहीं बताया जा रहा. वहीं दूसरी ओर मामले में पक्षकार सवाई मानसिंह ट्रस्ट की ओर से कहा गया कि संविधान के प्रावधानों के तहत प्रकरण में दखल देने का अधिकार सिर्फ राष्ट्रपति को भी प्राप्त है. ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए. इस पर याचिकाकर्ता का कहना है कि याचिकाकर्ता ने संपत्ति के विवाद का नहीं, सिर्फ संपत्ति की सूची जारी करने की प्रार्थना का है. गौरतलब है कि याचिका दायर होने के बाद हाईकोर्ट कई बार सूची सार्वजनिक करने का कह चुका है. अदालत में यह भी सामने आ चुका कि केन्द्र सरकार ने सूची राज्य सरकार को भेजी थी, लेकिन अब राज्य सरकार के पास ऐसी कोई सूची नहीं है.