नागौर: क्वारंटाइन सेंटर में युवा निभा रहे राष्ट्रधर्म, स्कूलों में कर रहे श्रमदान

स्कूल में गांव के भामाशाहों की मदद से श्रमिकों ने रंग-रोगन करके स्कूल की कायापलट कर दी है.

नागौर: क्वारंटाइन सेंटर में युवा निभा रहे राष्ट्रधर्म, स्कूलों में कर रहे श्रमदान
प्रतीकात्मक तस्वीर.

हनुमान तंवर, नागौर: बाहरी प्रदेशों में फंसे श्रमिक जब वापस अपने गांव पहुंचे तो उन्हें क्वारंटाइन सेंटर में आइसोलेट कर दिया गया मगर श्रमिक है, श्रम किए बिना रह नहीं सकता और यहां क्वारंटाइन सेंटर में श्रमदान कर स्कूलों की सूरत बदल रहे हैं. नागौर जिले के केराप गांव में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर यानी गांव के स्कूल में गांव के भामाशाहों की मदद से श्रमिकों ने रंग-रोगन करके स्कूल की कायापलट कर दी है.

डीडवाना उपखंड क्षेत्र के केराप गांव में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में 30 से ज्यादा लोग आइसोलेट किए गए हैं. सब गांव के ही युवा हैं, जो कभी इसी गांव में पले बढ़े और इसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर बाहर अन्य प्रदेशों में रोजी-रोटी के लिए चले गए. जब लॉकडाउन लगा तो गांव की जड़ें खुद-ब-खुद खींच लाई और गांव के बदहाल पड़े स्कूलों के हालात देखे तो युवाओं ने स्कूलों के कायापलट की सोची और गांव के उन भामशाहों को अपना मानस बताया, जो स्कूल के लिए मदद कर सकते हैं. 

केराप गांव में मनवीरसिह ने जिम्मेदारी ली और गांव के स्कूल में रंग-रोगन का काम शुरू कर दिया. यही नहीं, पेड़-पौधों के गड्ढे बनाकर उनमें नियमित पानी दिया जा रहा है. साथ ही बड़े पेड़-पौधों की छंटाई भी कर रहे हैं. श्रमिकों ने स्कूलों को साफ-सुथरा कर चमका दिया है. 

हम पूरा कर रहे हैं दायित्व 
भामाशाह मनवीर सिंह ने बताया कि हमने श्रमिकों कहने पर इन्हें रंग-रोगन दिया यह बिना किसी मजदूरी के फ्री में काम कर रहे हैं और कह रहे हैं कि यह हमारे देश के लिए गांव के लिए फर्ज बनता है और यही दायित्व हम पूरा कर रहे हैं. गांव का कर्ज है. इस स्कूल में पढ़े, उसका कर्ज था. 

भामाशाह द्वारा श्रमिकों के लिए रोजाना फल भी वितरित किए जा रहे हैं तो गांव के आयुर्वेदिक चिकित्सक आइसोलेट युवकों को रोजाना योगा करवाने के साथ-साथ आयुर्वेदिक पद्धति से निरोगी कैसे बनें, यह भी सीख रहे हैं. गांव के स्कूल का यह आइसोलेशन केंद्र समय के सदुपयोग का स्कूल बन गया है.