राजस्थान- बीसलपुर बांध में गहराया है पानी का संकट, पांच जिलों के किसान हलकान

राज्य के इन जिलों में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले बीसलपुर बांध में महज 23.50 फीसदी ही पानी बचा है, जिससे 5 जिलों के किसानों और आम लोगों के लिए संकट खड़ा हो गया है. 

राजस्थान- बीसलपुर बांध में गहराया है पानी का संकट, पांच जिलों के किसान हलकान
पानी के संकट से जूझ रहे बीसलपुर बांध के संकट से निपचना नई सरकार के लिए चुनौती होगी.

आशीष चौहान,जयपुर: राजस्थान की सियासत में कौन किसे पानी पिलाएंगा, इसका फैसला तो ईवीएम खुलने के बाद साफ हो जाएगा, लेकिन आम लोगों के लिए पीने के पानी की उपलब्धता और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का काम नई सरकार के लिए काफी मुश्किल भरा होगा.

इस साल दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक बीसलपुर बांध में पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण राज्य के पांच जिलों में जलसंकट का खतरा मंडरा रहा है. राज्य के इन जिलों में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराने वाले बीसलपुर बांध में महज 23.50 फीसदी ही पानी बचा है, जिससे इन 5 जिलों के किसानों और आम लोगों के लिए संकट खड़ा हो गया है. इस गहराते जल-संकट के कारण माना जा रहा है कि इस साल 256 गांवों में सिंचाई और पीने के लिए पानी की आपूर्ति नहीं हो पाएगी.

फिलहाल बीसलपुर बांध में पानी की उपलब्धता के आधार पर पीने के पानी की आपूर्ति आठ दिसंबर से बंद किया जा चुका है. जिस कारण इस साल 256 गांवों में खेती के लिए पानी की आपूर्ति नहीं हो पाएगी. 

जयपुर और अजमेर सहित पांच जिलों की लाइफलाइन बीसलपुर बांध का जल स्तर 309.40 आरएल मीटर पानी रह गया है. यह केवल 9.191 टीएमसी पानी है जो कुल क्षमता का 23.50 फीसदी ही है.

मानसून तक जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा के गांव, कस्बों में यहां से पानी सप्लाई होना है. लेकिन विभाग ने जयपुर शहर में बंद, पुराने 194 ट्यूबवेल चालू करने के बाद बीसलपुर प्रोजेक्ट से 300 लाख लीटर पानी लेना फिलहाल पानी लेना कम किया है. 

इसके अलावा जयपुर शहर में रोजाना 4200 लाख लीटर पानी की सप्लाई होती है. इसमें से 3200 लाख लीटर पानी बीसलपुर, 1000 लाख लीटर पानी ट्यूबवेल से लिया जा रहा है. फिलहाल शहर में अब 2259 ट्यूबवेल से पानी लिया जा रहा है. 

इसके अलावा विभाग ने पिछले दस साल से बंद बड़े 274 ट्यूबवेल शुरु करने हैं, लेकिन प्रमुख सचिव रजत कुमार मिश्र की सख्ती के बावजूद केवल 194 ट्यूबवेल ही शुरु हो पाए हैं. बंद और पुराने ट्यूबवेल के लिए तीन महीने पहले 5 करोड़ रुपए जारी कर दिए थे. 

सिंचाई विभाग के सूत्रों का कहना है कि बांध के कमांड एरिया की 81 हजार 800 हेक्टेयर जमीन पर केवल 70 फीसदी क्षेत्र में ही रबी की बुआई हुई है. यहां फसल की सिंचाई अब केवल ट्यूबवेल और कुओं से हो पाएगी. इससे पहले बीसलपुर बांध से हर साल टोंक, टोडारायसिंह, देवली , उनियारा तहसीलों के 256 गांवों में सरसों, गेहूं, चना सहित अन्य रबी की फसल की सिंचाई होती थी. 

20 साल में दूसरी बार ऐसा मौका आया है जब बीसलपुर बांध से खेती और पीने के लिए पानी की आपूर्ति नहीं हो पाएगी. आपको बता दें कि, मानसून में केवल 6 टीएमसी पानी आया. जबकि बांध में 7 अक्टूबर को अधिकतम जल स्तर 310.22 आरएल मीटर था. यह पिछले 8 साल में सबसे निचले स्तर पर है. 

जल आपूर्ति के गहराते संचट के बीच जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों ने कमांड एरिया के गांवों में जाकर इस बात की सूचना दे दी है कि खेती के लिए पानी की आपूर्ति संभव नहीं है. किसान और स्थानीय लोगों को नई सरकार के गठन का इंतजार है. माना जा रहा है नई सरकार के लिए पांच जिलों की प्यास बुझाना और इस समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाना सबसे बड़ी चुनौती होगी.