अंधविश्वास के कारण इलाज छोड़ परिजनों ने अस्पताल में ही शुरू की महिला की झाड़फूंक

दर्द से कराहती एक महिला को उसके परिजन झालावाड़ जिले के ग्रमीण क्षेत्र में बने एक अस्पताल में लेकर आए.

अंधविश्वास के कारण इलाज छोड़ परिजनों ने अस्पताल में ही शुरू की महिला की झाड़फूंक
जब महिला को दर्द से निजात नहीं मिली, तब कहीं जाकर अस्पताल का उपचार शुरू करने दिया.

चौमहला: झालावाड़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में लोग आज भी टोने टोटके व अंधविश्वास मे जकड़े हुए है. अंधविश्वास की ऐसी ही एक घटना चौमहला सीएचसी मे देखने को मिली जहां जहरीले जीव के काटने के बाद एक महिला को अस्पताल में लाया गया था.

खबरों की मानें तो दर्द से कराहती एक महिला को उसके परिजन झालावाड़ जिले के ग्रमीण क्षेत्र में बने एक अस्पताल में लेकर आए. लेकिन उससे पहले की अस्पताल के डॉक्टर महिला का इलाज शुरू कर पाते परिजनों के ही साथ आए एक बुजुर्ग शख्स ने अस्पताल में इलाज से ही पहले ही झाड़फूंक शुरू कर दी. अंधविश्वास के इस नजारे को देखकर हर कोई भौचक्का हो गया. 

यहां तक की डॉक्टरों नें वहां खड़े महिला के परिजनों से दर्द से कराहती महिला का उपचार करने की बात कही लेकिन घर वाले नहीं माने. महिला दर्द से कराह रही थी, लेकिन परिजन के साथ पहुंचा बुजुर्ग झाड़ फूंक करने में ही लगा था. काफी देर के बाद भी जब महिला को दर्द से निजात नहीं मिली, तब कहीं जाकर अस्पताल का उपचार शुरू करने दिया. 

मौजूद लोगों ने बताया कि देर रात जिले के करणपुरा गांव मे खेती का काम करने के दौरान एक महिला को बिच्छु ने डंक मार दिया. परिजन उसे चौमहला चिकित्सालय तो लेकर आए लेकिन उपचार से पहले ही परिजनों के साथ पहुंचे आदमी ने अस्पताल परिसर मे झाड़फूंक का कार्य शुरू कर दिया और परिजन सहित वहां मौजूद लोग तमाशा देखते रहे.

हालांकि चौमहला चिकित्सालय के डॉक्टर दीपक बैरवा की मानें तो उन्होनें अस्पलात में खुलेआम चल रहे इस झाड़फूक को करने के लिए उस बुजुर्ग को कई बार मना भी किया लेकिन वह नहीं माना, यहां तक की इस काम के लिए महिला के परिजनों ने भी कोई विरोध नहीं किया.

ये सब करने के बाद भी महिला को आराम नहीं मिला तब कहीं जाकर मेडिकल ट्रीटमेंट शुरू हुआ. फिलहाल महिला की हालत ठीक बताई जा रही है. लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि अस्पताल में पूरे स्टाफ के सामने ही अंधविश्वास का ये तमाशा जारी रहा और कोई रोक भी नहीं पाया.