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जोधपुर: बारिश की बेरुखी से गहराया जलसंकट, चलाई जाएगी वाटर ट्रेन

जोधपुर शहर का पिछले एक दशक में काफी विस्तार हुआ है. लगातार आवासीय कॉलोनियों के विकसित होने से पानी की खपत भी बढ़ी है. 

जोधपुर: बारिश की बेरुखी से गहराया जलसंकट, चलाई जाएगी वाटर ट्रेन
जोधपुर के जलाशयों में महज 5 से 6 दिन का पानी ही बचा है.

अरुण हर्ष/जोधपुर: बारिश में देरी के चलते अब प्रदेश में जलसंकट गहराने लगा है और इसका पहला असर पाली जिले में होता नजर आ रहा है. पाली जिले के मुख्य पेयजल स्त्रोत जवाई बांध में पानी नहीं होने से अब एक दशक बाद वापस जोधपुर से पाली तक वाटर ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से ही पानी की कमी का दंश झेल रहा जोधपुर आखिरकार पाली की प्यास कैसे बुझा पाएगा.

जोधपुर शहर का पिछले एक दशक में काफी विस्तार हुआ है. लगातार आवासीय कॉलोनियों के विकसित होने से पानी की खपत भी बढ़ी है. हालात यह है कि जोधपुर के जलाशयों में महज 5 से 6 दिन का पानी ही बचा है. पानी की आवश्यकता के मुकाबले बहुत कम पानी उपलब्ध हो रहा है. पानी की इस कमी को पूरा करने के लिए जलदाय विभाग की और से एकांतरे पानी की सप्लाई की जा रही है लेकिन अब यह जलसंकट और ज्यादा गहरा सकता है. पाली का मुख्य स्त्रोत जवाई बांध में पानी खत्म होने को है ऐसे में पाली को पानी पिलाने के लिए जोधपुर से वाटर ट्रेन चलाने की तैयारी की जा रही है.

वहीं, 23 जुलाई तक बारिश नहीं होने पर 24 जुलाई से वाटर ट्रेन चलाने का निर्णय किया जा चुका है, ऐसे में 100 लाख लीटर अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होगी. पानी की इस अतिरिक्त मांग के लिए या तो राजीव गांधी लिफ्ट नहर से अतिरिक्त पानी मंगवाना पड़ेगा या जोधपुर व आस-पास के गांव में पानी की कटौती करनी होगी. जोधपुर शहर की प्यास बुझाने वाले कायलाना और तख्तसागर में जलस्तर तेजी से गिर रहा है. अब विभाग ने भी गुपचुप तरीके से पानी की कटौती भी शुरू कर दी है. जोधपुर से पाली तक वाटर ट्रेन चलाने के लिए जलदाय विभाग के अधिकारी पिछले कुछ दिनों से जोधपुर में ही डेरा डाले हुए हैं. लगातार इस संबंध में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही है.

हालांकि जलदाय विभाग के अधिकारी मानते हैं कि वर्तमान में जोधपुर में भी पेयजल के हालात अच्छे नहीं हैं.लेकिन फिर भी उन्हें विश्वास है कि अगर जोधपुर शहर से पानी पाली भेजा जाता है. कभी जोधपुर शहर में पानी का संकट खड़ा नहीं होगा बीच में हालांकि नहर से पानी कम आया था, लेकिन अब पानी की मात्रा बढ़ने के कारण से जोधपुर शहर में पानी की दिक्कत नहीं होगी ऐसा अधिकारियों का मानना है.

लेकिन जोधपुर शहर वासियों के मन में पाली को पानी सप्लाई करने की बात को लेकर काफी संशय है. वर्तमान में मांग के अनुपात में उपलब्ध काफी कम है और इस कारण एकांतरे पानी की सप्लाई की जा रही है. यदि पाली के लिए वाटर ट्रेन चलाई जाती है तो निश्चित रूप से अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होगी. इसके लिए जलदाय विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. शहरवासियों का कहना है कि पाली तक वाटर ट्रेन चलाने से जोधपुर में जल संकट और ज्यादा गहराएगा. इस कारण जोधपुर के हिस्से की पानी की कटौती की जाएगी. इसलिए प्रशासन और राज्य सरकार को जोधपुर के हितों का भी ध्यान रखना होगा कि कहीं पाली की प्यास बुझाने के चक्कर में जोधपुर वासियों के सामने पेयजल का संकट खड़ा नहीं हो जाए.

'जल ही जीवन है' शायद यह पंक्तियां वर्तमान के परिपेक्ष में सटीक बैठती है. मानसून में हो रही देरी से जहां धरती पुत्रों के चेहरे उदास हैं तो वहीं अब शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बनती जा रही है. ऐसे में अभी से हमें जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाना होगा. बारिश में गिरने वाली एक एक बूंद का संचय करना होगा ताकि आने वाले भविष्य के लिए पानी को बचाया जा सके.