डूंगरपुर बिजली निगम का कारनामा, बिना कनेक्शन लोगों को भेज रहे लाखों के बिल

बिजली के बिलों में डूंगरपुर एवीवीएनएल की लापरवाही सामने आई है.

डूंगरपुर बिजली निगम का कारनामा, बिना कनेक्शन लोगों को भेज रहे लाखों के बिल
प्रतीकात्मक तस्वीर.

अखिलेश शर्मा, डूंगरपुर: जिले में बिजली निगम की लापरवाही और अंधेरगर्दी के चलते गरीब और आम आदमी की नींद उड़ी हुई है. डूंगरपुर एवीवीएनएल ने जिन घरों में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं, उनको भी बिजली के बिल थमा दिए हैं. 

वहीं, बीपीएल परिवारों के घरों में भी 20-20 हजार तक के बिल हैं. इतना ही नहीं, एक उपभोक्ता को तो बिजली विभाग ने एक लाख रुपये से अधिक तक बिल थमा दिया जबकि जांच में 12 हजार रुपये का बिल निकला है. 

कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में 22 मार्च से लॉकडाउन लागू हो गया था.  इसके बाद लोगों के काम-धंधे सब चौपट हो गए, तो कइयों का रोजगार भी छिन गया. ऐसे में सरकार ने बिजली बिल की दरों में छूट देने की बात कही थी लेकिन अब अनलॉक के साथ ही बिजली के बिल उपभोक्ताओं के पास पंहुचे, तो लोगों को बिजली बिलों का ऐसा झटका लगा कि वे चकरा गए हैं.

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बिल पाकर लोग हैरान
बिजली के बिलों में डूंगरपुर एवीवीएनएल की लापरवाही सामने आई है. डूंगरपुर एवीवीएनएल ने कांकरादरा निवासी एक ऐसे व्यक्ति को बिल थमा दिया, जिसके घर पर बिजली का कनेक्शन तक नहीं है. वहीं, एक बीपीएल परिवार को भी 20 हजार रुपये का बिल थमाया गया है. पीड़ित परिवार का कहना है कि उसके घर पर एक पंखा और बल्ब के साथ पानी की मोटर चलती है लेकिन विभाग ने उसका बिल 20 हजार थमाया है. इसके अलावा भी कई ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन्हें बिजली विभाग की ओर से अधिक बिल थमाए गए हैं.

लोगों को थमा रहे बड़े-बड़े बिजली बिल
इतना ही नहीं, हद तो तब हो गई, जब बिजली विभाग ने शहर निवासी एक उपभोक्ता को एक लाख 8 हजार का बिल पकड़ा दिया. इधर भारी भरकम बिल को देखकर उपभोक्ता के होश उड़ गए और उपभोक्ता बिल लेकर बिजली विभाग के ऑफिस पहुंचा और अपनी आपत्ति दर्ज करवाई. वहीं, जांच में बिजली विभाग ने अपनी गलती मानी और एक लाख 8 हजार की जगह उसका बिल 12 हजार 600 रुपये किया.

बहरहाल, पूरे मामले में मनमर्जी से बिल की राशि के लिए प्रथम दृष्टया मीटर रीडिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. स्पष्ट रीडिंग दिखने के बाद भी रीडर्स मर्जी से लेजर में यूनिट दर्ज कर रहे हैं. दूसरी और हज़ारों उपभोक्ताओं के लाखों रुपये के बिल आने के बाद भी न तो एकाउंट्स और न ही तकनीकी अधिकारी मामले की तह में जा रहे है कि आखिर चूक की स्तर पर हो रही है. खैर उपभोक्ता अपने स्तर पर बिजली विभाग के चक्कर काट कर अपने बिल ठीक करवा रहे हैं लेकिन कोरोना महामारी के उपजे आर्थिक संकट के बीच बढ़े हुए बिजली के बिलों ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए कोड में खाज का काम किया है.