Dungarpur: अधिकारियों की लापरवाही से अटका शिक्षकों का स्थायीकरण, शुरू किया आंदोलन

Dungarpur Samachar: इसमें कई ऐसे शिक्षक हैं जो बाहरी राज्यों से डिग्री करके आए हैं, उनकी डिग्री का सत्यापन भी नहीं हुआ है और इसका असर शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड पर पड़ रहा है.

Dungarpur: अधिकारियों की लापरवाही से अटका शिक्षकों का स्थायीकरण, शुरू किया आंदोलन
शिक्षकों ने स्थायीकरण को लेकर शुरू किया आंदोलन. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Dungarpur: डूंगरपुर जिले में शिक्षा विभाग व पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते वर्ष 2016-18 तक नियुक्त शिक्षकों के स्थायीकरण का मामला अटका हुआ है. विभाग की ओर से उन शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन का कार्य नहीं होने से उनका स्थाईकरण नहीं हो सका है. इसमें कई ऐसे शिक्षक हैं जो बाहरी राज्यों से डिग्री करके आए हैं, उनकी डिग्री का सत्यापन भी नहीं हुआ है और इसका असर शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड पर पड़ रहा है. वहीं, शिक्षको के विरोध के बाद अब शिक्षा विभाग व जिला परिषद स्थायीकरण के मुद्दे को लेकर नींद से जागा है.

दरअसल, राज्य सरकार की ओर से सरकारी कर्मचारियों की भर्ती के बाद 2 साल का समय परिवीक्षाकाल का होता है. इस दौरान विभाग की ओर से अभ्यर्थी की तरफ से दिए गए दस्तावेज और डिग्रियों की जांच करनी होती है और जैसे ही 2 साल का समय पूरा होता है तो उन कर्मचारियों का स्थायीकरण किया जाता है.

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इसके तहत जिले में ऑफलाइन आवेदन करने वाले 392 शिक्षकों को तो स्थाई कर दिया गया वहीं, ऑनलाइन आवेदन करने वाले 453 शिक्षक जिला परिषद और शिक्षा विभाग के बीच चक्करगिनी बने हुए हैं. ऑनलाइन आवेदन करने वाले पंचायतीराज के माध्यम से शिक्षा विभाग में नियुक्त शिक्षकों के दस्तावेज और डिग्रियों की जांच नहीं हो सकी है और इसका असर उनके स्थाईकरण पर पड़ रहा है. 

जानकारी के अनुसार, बाहरी राज्यों के डिग्रीधारी शिक्षकों के स्थायीकरण और नियमितीकरण के लिए पिछले 4 सालों से कोई कमेटी का गठन नहीं हुआ है, जिसके कारण साल दर साल सभी शिक्षक अपने दस्तावेज सत्यापन के लिए विभाग के चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं.

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खास बात यह भी है कि डूंगरपुर जिले में बाहरी राज्यों से डिग्री लेकर नौकरी हासिल करने वालों की डिग्री की जांचकर ही स्थाई करने की जिम्मेदारी संबंधित विकास अधिकारियों की थी. लेकिन अब तक यह कार्य शिक्षा विभाग और पंचायतीराज विभाग के बीच सामंजस्य नहीं होने से नहीं हो सका है.

इधर, शिक्षक संघ सियाराम और राष्ट्रीय  स्थायीकरण में लेटलतीफी की खिलाफत करते हुए अब आंदोलन पर उतारू है और हर हाल में स्थाईकरण के लिए संघर्ष कर रहा है. ऐसे में ऑनलाइन आवेदन करने वाले राजस्थान के डिग्रीधारियों के 356 आवेदन स्वीकार कर लिए गए है. वहीं, 160 ऑनलाइन आवेदनों की प्रिंटिंग प्रक्रिया चल रही है तो शेष बचे 293 प्रोसेस में है. साथ ही बाहरी राज्यों की डिग्री जांचने के लिए दल भी रवाना हो गए है.

बहरहाल शिक्षक संगठनों के आन्दोलन व विरोध के बाद डूंगरपुर शिक्षा विभाग व पंचायतीराज विभाग के अधिकारियों की नींद टूटी है और दोनों विभागों ने इसके लिए प्रोसेस शुरू कर दिया है.

(इनपुट-अखिलेश शर्मा)