200 साल पुरानी परंपरा, डूंगरपुर का बांसड़ समाज बना रहा है ‘धधकते रावण’

Rajasthan News: डूंगरपुर का बांसड़ समाज 200 सालों से रावण पुतले बनाने की परंपरा निभा रहा है. इस साल 20+ शहरों में यहां बने रावण जलेंगे. डूंगरपुर में 41 फीट रावण दहन होगा. हर पुतले से 5-6 हजार की कमाई, युवाओं को सीजन में 25 हजार तक आय हो जाती है.

200 साल पुरानी परंपरा, डूंगरपुर का बांसड़ समाज बना रहा है ‘धधकते रावण’
Image Credit: bhilwara ravan

Dungarpur News: प्रदेश के आदिवासी बहुल डूंगरपुर जिले के बांसड समाज के लोगो द्वारा बनाए गए रावण का राजस्थान सहित गुजरात और एमपी में दहन होगा. इस वर्ष बांसड समाज को रावण बनाने के कई ऑर्डर मिले है. जिसके तहत बांसड समाज के लोगो द्वारा रावण के पुतले को अंतिम रूप देने में लगे है. वही डूंगरपुर में विजयादशमी पर लक्ष्मण मैदान में 41 फीट के रावण व उसके परिवार का दहन होगा.

पिछले 200 सालों से बना रहे हैं रावण के पुतले
बांस को अपने औजारों से आकार देते हुए हर प्रकार के दैनिक उपयोगी सामान बनाने में माहिर बांसड़ समाज पिछले 200 सालों से रावण और उसके परिवार के पुतले बना रहे हैं. पुतले कम खर्चीले, पर्यावरण के लिए लाभकारी और सुंदर आकर्षक बनाए जाते है. इस बार करीब 20 से ज्यादा शहरों में डूंगरपुर के कारीगर रावण के पुतले बना रहे हैं. यहां के कारीगरों द्वारा बनाए गए रावण परिवार के पुतले राजस्थान सहित समीपवर्ती गुजरात व एमपी राज्य के कई शहरों, कस्बों में दशहरे के दिन आतिशी दहन के साथ जलेंगे. पुतलों का निर्माण करना यहां के बांसड़ समाज का पुश्तैनी पेशा है.

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यूं जुटता है समाज
बांसड़ समाज के कुछ लोगों ने दशकों पूर्व बांस की छाबड़ियां, टोकरे बनाने व बांस बेचने के पारंपरिक काम के साथ ही रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतले बनाने का काम भी शुरु किया था. यह काम ऐसा फला फूला कि अब परिवारों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है. यह परिवार पुतलों का कुछ भाग यहां तैयार कर निर्धारित स्थान पर ले जाकर पुतलों का पूरा ढांचा तैयार किया जाता है. बांसड समाज के करीब 100 परिवारों मुखिया से लेकर बच्चे तक इसमें जुटते है. बांसड़ समाज के युवा बांस की लकड़ी, कागज और आटे की लेई का इस्तेमाल करके पुतले बनाते हैं. इस प्रक्रिया में, सबसे पहले बांस से पुतले का ढांचा तैयार किया जाता है. इसके बाद, आटे की लेई से कागज को चिपकाकर पुतले को आकार दिया जाता है. एक पुतले को बनाने में लगभग पांच दिन का समय लगता है, और हर युवा एक महीने में 6-7 पुतले तैयार कर लेता है. एक पुतले से लगभग 5,000 से 6,000 की कमाई होती है. इस तरह, दशहरा के सीजन में एक युवा 20,000 से 25,000 रुपए तक कमा लेता है.

डूंगरपुर में इस वर्ष 41 फीट ऊंचे रावण का दहन
डूंगरपुर नगरपरिषद की ओर से इस बार शहर के लक्ष्मण मैदान में 41 फीट ऊँचे रावण, मेघनाथ व कुम्भकर्ण के पुतले का दहन किया जाएगा. इन पुतलो का निर्माण भी बांसड समाज के युवा कर रहे है. पिछली बार रावण व उसके परिवार के पुतलो की ऊंचाई 30 फीट थी इस बार करीब 11 फीट पुतलो का कद बढाया गया है.

देशभर में जाता है डूंगरपुर का रावण
बांसड़ समाज के हर युवा रावण बनाने के काम के लिए देशभर के अलग-अलग शहर और कस्बों में भी जाता है. ऐसे में अपने रावण से मिलने वाली आय का 10 प्रतिशत हिस्सा बाबा रामदेव मंदिर के लिए देने का प्रावधान है. इसके साथ ही डूंगरपुर नगर परिषद का ठेका भी हर बार रोटेशन पद्वति से अलग-अलग परिवार को मिलता है. रावण निर्माण से होने वाली आय के 10 प्रतिशत हिस्से से बाबा रामदेव मंदिर के माध्यम से उत्सव बनाया जाता है. इसके साथ ही समाज के विकास में काम आता है.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.
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