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Dungarpur News: राजस्थान के डूंगरपुर जिले में भारतीय जैन संघटना की ओर से जिले के तालाबों और जलाशयों को पुनर्जीवित करने की पहल के तहत राज्य सरकर के वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की कड़ी में डूंगरपुर शहर की हृदय स्थली गेप सागर झील की डिसिल्टिंग के काम का आगाज किया गया.
डूंगरपुर जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने इसका शुभारंभ किया. अभियान के तहत शहर की गेप सागर झील की डिसिल्टिंग का काम करते हुए उसकी भराव क्षमता को बढाया जाएगा. डूंगरपुर जिले में पानी के संकट को देखते हुए डूंगरपुर जिले में भारतीय जैन संघटना ने जिले के तालाबों व जलाशयों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठा रखा है.
इसी के तहत पिछले साल भारतीय जैन संघटना ने डूंगरपुर पंचायत समिति के पाटडी गांव के एडवर्ड समंद तालाब की डिसिल्टिंग का कार्य किया था. वहीं इस वर्ष भारतीय जैन संघटना ने डूंगरपुर शहर की हृदय स्थली गेप सागर झील की डिसिल्टिंग का काम हाथ में लिया है. डूंगरपुर जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, भारतीय जैन संघटना के अध्यक्ष नीरव जैन ने झील की खुदाई के कार्य का शुभारंभ किया.
भारतीय जैन संघटना की पहल की कलेक्टर ने की तारीफ
डूंगरपुर जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने जैन समाज के इस अभियान की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के जीवन में जल का बड़ा महत्व है. ऐसे में जल के संरक्षण व बचाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकार की ओर से कल से वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान की शुरुआत की जा रही है.
वहीं इसी कड़ी में भारतीय जैन संघटना ने भी सरकार के इस अभियान में सहयोग करते हुए शहर की गेप सागर झील के गहरे करने के कार्य को हाथ में लिया है. भारतीय जैन संघटना के इस अभियान से झील की खुदाई होने से वर्षा का जल अधिक संचित होगा. वहीं झील में पानी की उपलब्धता होने से जल स्तर बढ़ने के साथ मवेशियों को भी पानी की दिक्कत नहीं आएगी.
बारिश आने तक चलेगा खुदाई व डिसिल्टिंग का काम
भारतीय जैन संघटना के जिला अध्यक्ष नीरव जैन ने बताया कि अभियान के तहत भारतीय जैन संघटना की ओर से झील की खुदाई व डिसिल्टिंग कार्य के लिए 1 जेसीबी, 1 एलएनटी और 7 ट्रैक्टर-ट्रॉली लगाई गई है. ये मशीने बारिश शुरू होने तक इस झील की खुदाई व डिसिल्टिंग का कार्य करेंगी, ताकि आने वाले समय में तालाब की भराव क्षमता अधिक हो.
वहीं आने वाली गर्मियों में पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़े. वहीं नीरव जैन ने बताया कि आने वाले समय में जिला प्रशासन का सहयोग लेते हुए अन्य तालाबों की भी डिसिल्टिंग करते हुए उन्हें गहरा किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक मात्रा में बारिश के पानी का तालाब में संचय हो सके.
बहरहाल गर्मी के मौसम में पानी के संकट को देखते हुए भारतीय जैन संघटना की ओर से तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए की गई पहल काबिले तारीफ है. परंपरागत जल स्रोत के संरक्षण से आने वाले समय में इन जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता होगी, जिससे आसपास के लोगों व मवेशियों को तो पानी सुलभ हो सकेगा. वहीं जल स्तर भी बढेगा.
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Reporter- Akhilesh Sharma