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राजस्थान में चुनावों की तैयारी में जुटा EC, फर्जी मतदाताओं पर भी रख रहा नजर

राजस्थान में हजारों मतदाताओं के एक से ज्यादा वोटर कार्ड बने हुए हैं. कांग्रेस लगातार निर्वाचन विभाग में मतदाता सूचियों में एक व्यक्ति के दो से तीन नाम होने की शिकायत दर्ज करा चुकी हैं. 

राजस्थान में चुनावों की तैयारी में जुटा EC, फर्जी मतदाताओं पर भी रख रहा नजर

जयपुर: राजस्थान में तीन महीने में चुनाव होने हैं. ऐसे में चुनाव आयोग तैयारियों में जुटा हुआ है. कांग्रेस और बीजेपी समेत दूसरी पार्टियां अभी से ही कमर कस चुकी हैं लेकिन चुनाव की तैयारी में वोटर लिस्ट एक समस्या बनी हुई है. राजस्थान में वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां देखने को मिल रही हैं. हालात ऐसे हैं कि वोटर लिस्ट में एक ही शख्स के दो, तीन यहां तक कि छह-छह जगह नाम देखने को मिल रहे हैं.

राजस्थान में हजारों मतदाताओं के एक से ज्यादा वोटर कार्ड बने हुए हैं. कांग्रेस लगातार निर्वाचन विभाग में मतदाता सूचियों में एक व्यक्ति के दो से तीन नाम होने की शिकायत दर्ज करा चुकी हैं. तो उधर जयपुर निर्वाचन विभाग ने जिले की 19 विधानसभा क्षेत्र में 10 लाख सस्पेक्ट मतदाताओं की जांच की तो 1 लाख 4 हजार फर्जी मतदाताओं का चौकाने वाले आंकड़ा सामने आया.

क्या है फर्जी मतदाता की श्रेणी
- वे मतदाता जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर जुड़ चुके.

- राजस्थान से बाहर जा चुके फिर भी राज्य की सूची में नाम है.

- मृत्यु होने के बाद भी मतदाता सूची से नाम नहीं हटाए गए.

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जयपुर जिले में करीब 1 लाख 12 हजार फर्जी और संदिग्ध मतदाता होने का खुलासा हुआ है. सबसे ज्यादा सांगानेर, विद्याधर नगर और किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में फर्जी मतदाता हैं. इनका खुलासा चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा की जा रही ऑटो स्केनिंग से हुआ है. इन्हें डेथ, शिफ्टेड और माइग्रेशन के साथ मल्टीपल एंट्री के पैरामीटर पर फर्जी पाया गया और अब इन पर कैची चलना शुरू हो चुकी हैं. 

मतदाता सूचियों में संशोधन कर नई मतदाता सूचियां तैयार करने का काम युद्धस्तर पर जारी है. संभवत: करीब तीन माह बाद विधानसभा चुनाव हैं. इससे पहले जिले से सभी संदिग्ध मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए जाने का प्रशासन ने दावा किया है. जिला प्रशासन ने सभी 19 विधानसभाओं में प्रत्येक गांव और प्रत्येक बूथ स्तर पर बीएलओ भेजकर इन संदिग्ध मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करवाया तो सच सामने आने पर अफसरों के होश उड़ गए और तुरंत वोटर लिस्ट से संदिग्ध मतदाताओं के नामों पर कैची चलाना शुरू कर दिया. 

जिला निर्वाचन अधिकारी सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि निर्वाचन विभाग की ओर से डेमोग्राफिकल सिमिलर एंटी (डीसीई) सर्वे कराया जा रहा है. इसका उद्देश्य मतदाता सूचियों में वोटरों के कई जगह दर्ज नामों की छंटनी कर मतदाता का नाम सही जगह अंकित करना है. जिले में चल रहे ऑनलाइन चैकिंग सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े उजागर हुए हैं. जांच के दौरान अकेले जयपुर जिले में 10 लाख ऐसे मतदाताओं के नाम चिह्नित किए गए हैं, जिनके फोटो से मिलते जुलते चेहरे एक नहीं कई जगह दिखाई पड़ रहे हैं और जब सस्पेक्ट मतदाताओं की जमीनी स्तर पर जांच की तो 1 लाख 12 हजार फर्जी (डुप्लीकेट एंट्री), मृतक और दूसरी जगह शिफ्टटेड लोगों का चौकाने वाला आंकड़ा आमने आया.