गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया पर ED का शिकंजा, पोंजी स्कीम मामले में चार्जशीट दाखिल

चार्जशीट फाइल करने के बाद प्रभावित हजारों लोगों को उनकी जमा पूंजी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया पर ED का शिकंजा, पोंजी स्कीम मामले में चार्जशीट दाखिल
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: प्रवर्तन निदेशालय ने पोंजी स्कीम (Ponzi scheme) मामले में जयपुर सहित 27 शहरों में ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया कंपनी पर शिकंजा कसा है. 

कंपनी के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई है. मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को आर्थिक अपराध न्यायालय की विशेष अदालत में होगी. चार्जशीट फाइल करने के बाद प्रभावित हजारों लोगों को उनकी जमा पूंजी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

मुख्य बिंदु

  • प्रवर्तन निदेशालय ने गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया पर कसा शिकंजा
  • पोंजी स्कीम मामले में चार्जशीट दाखिल
  • अब 7 अगस्त को होगी मामले में अगली सुनवाई
  • पोंजी स्कीम में कमाई आरोपियों की संपत्ति भी होगी जब्त
  • नरेंद्र सिंह, महेंद्र कुमार निर्वाण, महेंद्र प्रताप सिंह चौहान
  • प्रमोद, बबलू शर्मा सहित 12 सहयोगियों पर होगी कारवाई
  • एक आरोपी की इस अवधि में हो चुकी हैं मौत
  • कुल 9 मामले निदेशकों और टीम लीडर्स पर किए थे दर्ज
  • वर्ष 2008-11 तक मुनाफे का लालच देकर करोड़ों का गबन
  • 27 शहरों के 1,20,000 लोग हैं प्रभावित
  • करीब 250 करोड़ रुपये अधिक मुनाफे का लालच देकर करवाये निवेश
  • कंपनी 3.06 करोड़ रुपये की संपत्ति कर चुका है अटैच

प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में कर रहा है जांच
जयपुर में ईडी मामलों की विशेष अदालत में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से साल 2011- 12 के चर्चित गोल्ड सुख प्रकरण में अभियोजन परिवाद दाखिल किया गया. ईडी के विशेष लोक अभियोजक जितेन्द्र सिंह पूनिया ने परिवाद पेश करते हुए न्यायालय को बताया कि इस प्रकरण में गोल्ड सुख ट्रेड इंडिया लिमिटेड तथा गोल्ड सुख कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी तथा इसके निदेशकों, शेयर होल्डर्स  तथा अन्य व्यक्तियों ने धोखाधड़ी से कंपनी की विभिन्न लोक लुभावनी स्कीमों में निवेश कराया था. मामले में जयपुर के विधायकपुरी थाने में साल 2011 में 9 एफ आई आर दर्ज की गई थी. ईडी ने मामले में दोनों कंपनियों सहित कुल 12 अभियुक्तों के विरुद्ध यह परिवाद पेश किया. इनमें कंपनी के निदेशक महेंद्र कुमार निर्वान और मानवेन्द्र प्रताप सिंह चौहान भी शामिल हैं. 

कंपनी के आरोपी 4 निदेशकों और उनके रिश्तेदारों ने साल 2008-09 से 2011-12 की अवधि के दौरान कंपनी द्वारा एकत्रित धन में से कुल 18 करोड़ 59 लाख 70 हजार 879 रुपए अर्जित किए थे, जिनमें से उपरोक्त कंपनी के निदेशकों, शेयर होल्डर्स और अन्य अभियुक्तों ने विभिन्न चल और अचल संपत्तियों में 3 करोड़ 6 लाख 23 हजार 513 रुपए निवेश किया. 

प्रकरण में ईडी की ओर से न्यायालय से अभियुक्तों के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध का प्रसंज्ञान लेकर अभियुक्तों को PMLA की धारा 4 के तहत दंडित करने और 3 करोड़ 62 लाख 23 हजार 513 रुपए के ईडी द्वारा कुर्क किए अपराध के आगम को जप्त करने का आदेश पारित किए जाने का आग्रह किया गया है. मामले में अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.