राजस्थान में विधानसभा चुनाव दो साल बाद, लेकिन गतिविधियां हुई तेज

राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने में अभी दो साल है लेकिन राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज हो गयी हैं। बीते साल कांग्रेस ने आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए डिनर डिप्लोमेसी (रात्रिकालीन भोज) का सहारा लिया वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने लाल बती बांटने (राजनीतिक नियुक्तियां) देने का सिलसिला तेज कर कार्यकर्ताओं को रिझाना शुरू कर दिया है।

राजस्थान में विधानसभा चुनाव दो साल बाद, लेकिन गतिविधियां हुई तेज

जयपुर: राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने में अभी दो साल है लेकिन राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज हो गयी हैं। बीते साल कांग्रेस ने आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए डिनर डिप्लोमेसी (रात्रिकालीन भोज) का सहारा लिया वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने लाल बती बांटने (राजनीतिक नियुक्तियां) देने का सिलसिला तेज कर कार्यकर्ताओं को रिझाना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस से नाता तोड़ कर भाजपा में गए पूर्व सांसद डॉ हरि सिंह कांग्रेस में इस साल लौट आए। उनकी वापसी पर कांग्रेस के कुछ नेताओं ने खुल कर विरोध जताया। बड़े अरमान ले कर भाजपा में गए डॉ सिंह खाली हाथ ही रहे। भाजपा में तीन साल से संगठन और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नीतियों का विधानसभा में और बाहर खुलकर कथित विरोध करने वाले पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाडी दीनदयाल वाहिनी के अध्यक्ष बनाए गए। भाजपा से ही नाराज होकर नयी पार्टी बनाकर सरकार और कांग्रेस पर सात साल से हल्ला बोल रहे वरिष्ठ विधायक डॉ किरोड़ी लाल मीणा भी सक्रिय हो गये हैं। संभावनाएं देखते हुए आम आदमी पार्टी ने भी सक्रियता बढा दी है लेकिन वाम दल फिलहाल बयानों तक ही सीमित हैं।

सत्ताधारी भाजपा ने पौने तीन साल तक राजनीतिक नियुक्तियां देने के लिए गहन विचार मंथन के बाद पिटारा खोलना आरंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में मंत्रिमंडल में फेरबदल कर छह मंत्रियों को शपथ दिलायी और पांच संसदीय सचिवों की नियुक्ति की। शपथ लेने वाले छह मंत्रियों में से दो को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री तथा चार नए विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। मुख्यमंत्री ने खराब प्रदर्शन के चलते दो मंत्रियों को बाहर भी किया। पूर्व नेताओं को भी मंडल और आयोग का अध्यक्ष और सदस्य बनाकर उपकृत किया गया है। 

मंत्रिमंडल विस्तार के अगले दिन ही नगर निगम के महापौर निर्मल नाहटा ने इस्तीफा दे दिया और तेजतर्रार लेकिन मिलनसार भाजपा पाषर्द अशोक लाहोटी महापौर बनाए गए। इस कवायद में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी की अहम भूमिका बताई जाती है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और परनामी आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए तेजी से संगठनात्मक निर्णय ले रहे हैं। राजे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से चुनाव के लिए कमर कसने का आहवान करने के साथ ही तेजी से घोषणाओं पर अमल करने और लोगों की समस्याओं का त्वरित गति से समाधान करने के निर्देश मंत्रियों और अधिकारियों को दिये हैं। स्वयं राजे भामाशाह योजना, अन्नपूर्णा रसोई सहित केन्द्र एवं राज्य की अन्य योजनाओं के सहारे विधानसभा चुनाव तक भाजपा लहर बनाने के लिए सघन दौरे कर रही हैं।

प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी विधानसभा चुनाव में जीत के लिए प्रयास करने में जुट गयी है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट अपनी टीम के सहारे राजस्थान के दौरे कर बिखरे कार्यकर्ताओं को एक साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं। बीते साल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान प्रभारी गुरूदास कामत का इस्तीफा और कुछ दिन बाद ही त्यागपत्र वापस लेने के घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस संगठन की कलह उजागर कर दी। कामत की मौजूदगी में एक कांग्रेस विधायक द्वारा एक नेता के समर्थन में हाथ उठाने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया। कामत के निर्देशों पर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं को एक साथ बैठाने के लिए रात्रि भोज की शुरुआत की गयी लेकिन राष्ट्रीय महासचिव और प्रदेश प्रभारी के निर्देश के बावजूद कई प्रदेश स्तरीय नेता समय समय पर अलग अलग कारण बताते हुए इस आयोजन से दूर रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सक्रियता से भी कांग्रेस का एक गुट परेशान है। पूर्व सांसद डॉ हरि सिंह की कांग्रेस में वापसी को लेकर नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी सहित पार्टी के कई नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जताई। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दलित लड़की की कथित हत्या के मामले की जांच को लेकर बाड़मेर यात्रा की और फिर जयपुर आकर सरकार के खिलाफ आवाज तेज की। 

नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने जनहित के मुद्दों को लेकर पूरे साल कांग्रेस और भाजपा को कठघरे में खड़ा किया। मीणा ने कई मौकों पर स्थानीय मुद्दों को लेकर रास्ता जाम कर और रैली आयोजित कर सरकार के लिए मुसीबतें भी खड़ी कीं। गत विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने में निर्णायक की भूमिका निभाने के दावे की हवा निकलने के बाद नेशनल पीपुल्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हर कदम फूंक फूंक कर रख रहे हैं। डॉ मीणा ने अपनी पुरानी पार्टी भाजपा के विधायक घनश्याम तिवाड़ी को सहयोग देने की घोषणा कर अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। तिवाड़ी ने भी प्रदेश भर में घूम घूम कर लोगों की समस्याओं की जानकारी हासिल करने का ऐलान किया है। दूसरी और नेशनल पीपुल्स पार्टी के नेता डॉ किरोड़ी लाल मीणा भी यही काम कर रहे हैं। जाहिर है कि दोनों ही दिग्गज राज्य सरकार के खिलाफ माहौल बनायेंगे।

भाजपा अपने विधायक घनश्याम तिवाड़ी को किस तरह से इस अभियान से दूर रखेगी, यह समय ही बताएगा। आम आदमी पार्टी भी प्रदेश के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी जाजम बिछाने का काम तेजी से कर रही है। पार्टी ने प्रदेश स्तर पर अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों की देखरेख में स्थानीय संगठन खड़ा कर लोगों को अपने साथ करने की मुहिम चलाई है। आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जयपुर यात्रा को इसी से जोड़कर देखा गया है। वाम दलों के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी फिलहाल बयानों तक ही सीमित हैं। उन्होंने कभी कभार किसी राष्ट्रीय मुद्दे को लेकर प्रदर्शन जरूर किये हैं।