नागौर: मनरेगा में गबन, बिना काम किये ही उठाया भुगतान, अब दे रहे जान से मारने की धमकी

देश के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी के लिए मनरेगा एक संजीवनी है. मनरेगा के जरिए खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर लोगों को रोजगार मिल जाता हैं, जिसकी वजह से गरीब मजदूर परिवारों की रोजी-रोटी चलती है.

नागौर: मनरेगा में गबन, बिना काम किये ही उठाया भुगतान, अब दे रहे जान से मारने की धमकी
प्रतीकात्मक तस्वीर

हनुमान तंवर, नागौर: देश के ग्रामीण क्षेत्रों की बड़ी आबादी के लिए मनरेगा एक संजीवनी है. मनरेगा (MANREGA) के जरिए खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर लोगों को रोजगार मिल जाता हैं, जिसकी वजह से गरीब मजदूर परिवारों की रोजी-रोटी चलती है. एक दूसरी हकीकत ये भी हैं, कि मनरेगा में बार-बार भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार आती रहती ,है लेकिन इसके बावजूद ना तो  ग्रामीण विभाग से जुड़े अधिकारी गंभीर दिख रहे हैं और ना ही ग्रामपंचायत के प्रतिनिधि. बल्कि ज्यादातर मामलों में मुखिया और सरपंच भी मनरेगा जैसी योजना में गड़बड़ी कर गरीबों का हक मार रहे हैं. नागौर के डीडवाना में भी ऐसा ही मामला सामने आया है. नागौर जिले के डीडवाना पंचायत समिति क्षेत्र के पूर्व सरपंच और ग्रामसेवक पर भी ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए एसीबी में परिवाद दर्ज करवाया है.

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फर्जी तरीके से गबन, निर्माण के नाम पर अपनी जेबें भरी
डीडवाना पंचायत समिति के आगुंता ग्राम पंचायत में फर्जी तरीके से मस्टरोल में नाम दर्ज कर कई लोगों के नाम फर्जी हाजरी दिखाकर पैसों का गबन करने का आरोप लगा है. मनरेगा में कई ऐसे लोगों के नाम से भी भुगतान उठा लिया गया, जो सालों से ना तो इस क्षेत्र में हैं, और ना ही इस क्षेत्र से अब वास्ता है. कई ऐसे प्रवासी श्रमिक शामिल है, जो मस्टरोल में दर्ज तारीख में यहां नहीं थे. उनका पैसा उठा कर सरकारी राशि का गबन किया गया. टांका निर्माण में भ्रष्टाचार करके 3 लाख 60 हजार की राशि गबन की गई. दो टांको में बिना मेड़बन्दी किये राशि गबन कर ली गई, ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि  ऐसा ग्राम पंचायत में दर्जनों लोगों के साथ हुआ है. ग्रामीणों ने  यह भी आरोप लगाया है कि सरपँच और ग्रामसेवक गौचर भूमि पर बिना कटाणी रास्ते के ग्रेवल सड़क का निर्माण करवाकर गौचर भूमि को नुकसान पंहुचाया और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया गया. इतना ही नहीं ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में निर्मित सीसी सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग कर गड़बड़ी का आरोप लगाया हैं साथ ही बिना नालियां के निर्माण किये ही भुगतान उठाया गया. भ्रष्टाचार की वजह से गांव में विकास का काम  नहीं हो पाया, गांव में आज भी पानी सड़कों पर बहकर बाहर आ रहा है.

ग्रामीणों ने की एसीबी से शिकायत, आरोपियों से मिली जान से मारने की धमकी
ग्रामीणों ने जब अपने खेतों में मनरेगा कार्य में सरपंच की लापरवाही बरती गई और निर्माण कार्य नहीं किया गया तो इसकी शिकायत एसीबी सहित पंचायतीराज विभाग, जिला कलेक्टर तक से की गई. ग्रामीण बीते आठ महीनों से एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस में भागदौड़ कर मनरेगा गड़बड़ी की जांच की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों की शिकायत पर अब सरपँचों ने शिकायतकर्ताओं को ही जान से मारने की धमकियां देना शुरू कर दिया है. सीएम पोर्टल सहित एसीबी में परिवाद दर्ज होने के बाद बीडीओ, अर्चना मौर्य हरकत में आई है और एक जांच दल गठित कर मनरेगा में हुए भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच करवाने का आदेश दिया है. 

गबन की राशि सरपंच और ग्रामसेवक से वसूलने की बात कही जा रही है, लेकिन ग्रामीणों को जांच को लेकर आशंका है कि जिस अधिकारी के हाथों सरपंच को भुगतान किया गया, क्या वह अधिकारी निष्पक्ष जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी कर पायेगा. एसीबी में परिवाद दर्ज होने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और गबन के आरोपियों से सरकारी राशि वसूलकर जमा की जाएगी. गरीबों के नाम से हुए मनरेगा कार्य फिर से हो सकेंगे, लेकिन दबंग सरपंच की धमकियां अब भी जारी है और शिकायकर्ताओं पर मामला वापस उठाने का दबाव बनाया जा रहा है.
COPY- SUJIT KUMAR NIRANJAN

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