कोटा: अस्पतालों में मरीज और डॉक्टर के बीच हंगामे को रोकने के लिए उठाया गया ये कदम, करेंगे तारीफ

यह कमेटी नए अस्पताल, एमबीएस और जेके लोन अस्पताल की इमजरेंसी सेवाओं का निरीक्षण करेगी. कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट तैयार कर प्राचार्य को सौंपेगी. उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.  

कोटा: अस्पतालों में मरीज और डॉक्टर के बीच हंगामे को रोकने के लिए उठाया गया ये कदम, करेंगे तारीफ
जेके लोन अस्पताल में एक सप्ताह में चार बार हंगामा हुआ था.

मुकेश सोनी, कोटा: मेडिकल कॉलेज से संबद्ध शहर के तीनों बड़े अस्पतालों में डॉक्टर और मरीज के बीच आए दिन होने वाली कहासुनी और हंगामे की घटनाओं को रोकने की कवायद शुरू हो गई है. इसके लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन द्वारा इमजरेंसी सेवाओं की कमियों को दूर किया जाएगा. 

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. विजय सरदाना ने इसके लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की. इसमें डॉ. देवेंद्र विजयवर्गीय, राकेश शर्मा, विनोद दहिया, गोपीकिशन, आरडीए अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोनी और सचिव को शामिल किया है. यह कमेटी नए अस्पताल, एमबीएस और जेके लोन अस्पताल की इमजरेंसी सेवाओं का निरीक्षण करेगी. कमेटी 15 दिन में रिपोर्ट तैयार कर प्राचार्य को सौंपेगी. उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

क्यों पड़ी जरूरत?
दरअसल, हाल ही के दिनों में शहर के तीनों बड़े अस्पतालों में इलाज में लापरवाही के मामले सामने आए थे. वहीं जेके लोन अस्पताल में एक सप्ताह में चार बार हंगामा हुआ था. एक के बाद एक हुई इन सभी घटनाओं से अस्पतालों की छवि के साथ-साथ मेडिकल कॉलेज प्रशासन की छवि पर असर पड़ रहा था, इनमें से अधिकतर घटनाएं इमरजेंसी सेवाओं के समय घटित हुई थी. कॉलेज प्रशासन ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए इमजरेंसी सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत महसूस की.

वर्क लोड और प्रेशर है कारण
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉं. विजय सरदाना भी मानते हैं कि सरकारी अस्पतालों में खासकर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में इमरजेंसी केस ज्यादा आते है. वर्क लोड और प्रेशर ज्यादा होने की वजह से हंगामे की घटनाएं होती हैं, जो नहीं होनी चाहिए. इमरजेंसी केस में इन्वेस्टिगेशन के बजाय हालत देखकर मरीज को तुरंत भर्ती किया जाना चाहिए. छह सदस्यों की कमेटी तीनों अस्पतालों के निरीक्षण कर गहराई से विवेचना करेंगे कि कौन-कौन से एरिया में कहां-कहां दिक्कत है, जिन्हें मजबूत करने की जरूरत है.

कमेटी की रिपोर्ट के बाद इन्हें लागू किया जाएगा ताकि अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्थाओं में सुधार हो. मरीज और तीमारदार से कैसा व्यवहार किया जाए, इसके लिए रेजीडेंट डॉक्टरर्स के लिए लगातार वर्कशॉप आयोजित की जाएगी ताकि उन्हें यहां की लोकल परिस्थियों के बारे में जानकारी रहे. किस तरह से पेशेंट के मैनेजमेंट के साथ, मेन मैनेजमेंट, अटेंडर के साथ और क्राउड (भीड़) मैनेजमेंट  करें. उनकी संतुष्टि तक मरीज को देखना ताकि दोनों पक्षो में कोई दिक्कत न हो. कमेटी रिपोर्ट पर कॉलेज कौंउंसिल में चर्चा करेंगे. इसे बड़े स्तर पर लागू करेंगे ताकि अस्पतालों में हंगामे की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.