देश के लोकतंत्र पर पहरा था 'आपातकाल', नई पीढ़ी उन इतिहास के पन्नों को जरूर पढ़े: पूनिया

पूनियां ने कहा, नई पीढ़ी इस आपातकाल से भलीभांति परिचित नहीं है. युवा पीढ़ी को पता नहीं है कि, यह दिन क्या महत्व रखता है.

देश के लोकतंत्र पर पहरा था 'आपातकाल', नई पीढ़ी उन इतिहास के पन्नों को जरूर पढ़े: पूनिया
पूनियां ने कहा, नई पीढ़ी इस आपातकाल से भलीभांति परिचित नहीं है.

जयपुर: राजस्थान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने गुरुवार को कहा कि, आपातकाल (Emergency) राष्ट्र में लोकतंत्र पर पहरा था, जिसके खिलाफ पूरा देश सड़कों पर उतरा और सरकार को जनता की चुनौती मिली.

पूनियां ने कहा, नई पीढ़ी इस आपातकाल से भलीभांति परिचित नहीं है. युवा पीढ़ी को पता नहीं है कि, यह दिन क्या महत्व रखता है. 25 जून 1975 भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास के इस काले अध्याय को पढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि, देश के लोकतंत्र पर पहरा बैठा दिया गया था, पूरा देश सड़कों पर उतरा और सरकार को जनता की चुनौती मिली.'

प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष, 'आपातकाल-भारतीय राजनीति का काला अध्याय' विषय पर फेसबुक (Facebook) के माध्यम से संवाद कर रहे थे. उन्होंने कहा कि, कालांतर में नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास को ठीक तरीके से पढ़ना चाहिए, जब कांग्रेस को छोड़कर सब विचारों के लोगों को प्रताड़ित किया गया.

बीजेपी नेता ने कहा, 'आपातकाल के बाद लोकतंत्र की रक्षा का एक बड़ा आंदोलन चला. आजादी के आंदोलन के बाद दूसरा बड़ा आंदोलन आपातकाल के दौरान हुआ. आंदोलन के बाद भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया.'

उन्होंने कहा कि, 'मैं नई पीढ़ी को यही कहूंगा कि, हम इतिहास के उन पन्नों को जरूर पढ़ लें, ताकि भारत के लोकतंत्र को अच्छी ताकत मिले.' उन्होंने कहा कि, लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी ताकत, सबसे बड़ी उपलब्धि है, जिसको दुनियाभर में अपने आपको साबित किया है.

(इनपुट-भाषा)