जयपुर: शराब ब्रिकी बढ़ाने के चक्कर में मानवाधिकारों का शोषण, रविवार को भी नहीं दी जा रही छुट्टी

पिछले कई महीनों से कर्मचारियों को रविवार का साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जा रहा.

जयपुर: शराब ब्रिकी बढ़ाने के चक्कर में मानवाधिकारों का शोषण, रविवार को भी नहीं दी जा रही छुट्टी
ताज्जुब की बात है कि रविवार का सरकारी अवकाश भी रद्द कर दिया है.

जयपुर: शराब की बिक्री कम होने और अधिकारियों की फटकार के डर से राजस्थान स्टेट ब्रेवरिज कॉरपोशन निगम (Rajasthan State Beverages Corporation Ltd) ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को बलि का बकरा बना दिया. 

शराब से राजस्व लक्ष्य प्राप्त करने लिए आरएसबीसीएल (RSBCL) ने श्रम कानूनों की भी अनदेखी कर दी है और शनिवार और रविवार को मिलने वाले अवकाश के दिन भी कर्मचारियों से काम करवाया जा रहा है. ताज्जुब की बात है कि रविवार का सरकारी अवकाश भी रद्द कर दिया है.

शराब की बिक्री बढ़ाने के चक्कर में कर्मचारियों के मानवाधिकारों का शोषण हो रहा है. पिछले कई महीनों से कर्मचारियों को रविवार का साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जा रहा. इसके चलते दूर-दराज नौकरी करने वाले श्रमिकों/कर्मचारियों को अपने परिवार से लगातार दूर रहना पड़ रहा है.

विभागीय कार्रवाई के डर से नहीं उठा रहा कोई आवाज
आबकारी विभाग के सप्लाई सेक्शन राजस्थान राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (आरएसबीसीएल) के अधिकारियों के आदेशों से कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो रहा है लेकिन विभागीय कार्रवाई के डर से कोई भी श्रमिक/कर्मचारी इसका विरोध नहीं कर पा रहा है. शराब सप्लाई का काम करने वाला करने वाले आरएसबीसीएल के प्रदेश में 40 डिपो हैं और प्रत्येक डिपो पर 15 से 20 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें पिछले कई माह से रविवार का साप्ताहिक अवकाश नसीब नहीं हो रहा.

पहले से ही जारी हो जाता है आदेश
स्थिति यह है कि अधिकारी रविवार आने से दो दिन पहले ही एक आदेश जारी कर देते हैं कि फलां तारीख को रविवार के दिन निगम के डिपो में सामान्य गतिविधियां यथा शराब की बिक्री, शराब और बीयर की लोडिंग और अनलोडिंग जारी रहे. इसके लिए डिपो मैनेजर पर्याप्त कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित रखे. विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि शराब ब्रिकी पॉलिसी में साफ लिखा है कि कार्यकारी निदेशक की अनुमति से अवकाश के दिन भी डिपो खोले जा सकते हैं.

9.30 घंटे करवाया जाता है काम
भारत में कारखाना अधिनियम के तहत भले श्रमिकों के लिए एक सप्ताह में अधिकतम 48 और एक दिन में 9 घंटे से अधिक नहीं काम करने का प्रावधान है. साथ ही सप्ताह में एक दिन अवकाश भी दिया जाना अनिवार्य है लेकिन आरएसबीसीएल में कर्मचारियों से प्रतिदिन साढ़े 9.30 घंटे काम करवाया जाता है और एक दिन का अवकाश भी निरस्त कर दिया जाता है. जुलाई माह तक अधिकारियों और कर्मचारियों के सभी अवकाश निरस्त किए गए. उसके दो माह बाद तक कर्मचारियों और अधिकारियों को अवकाश मिले लेकिन उसके बाद फिर से पुराने ढर्रे पर यानी की अवकाश के दिन भी डिपो खोले गए. 

सख्ती से पालना के निर्देश
इसके लिए गत वर्ष 8 जनवरी को तत्कालीन आबकारी आयुक्त ओपी यादव ने आदेश जारी कर डिपो खुलने का समय सुबह साढ़े 9.30 बजे से लेकर शाम 7 बजे कर दिया. साथ ही यह निर्देश दिए गए कि इस आदेश की पालना सख्ती से की जाए. अवहेलना करने पर डिपो प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी. खास बात यह है कि राजस्थान में जहां पांच दिन का सप्ताह घोषित है, वहां आरएसबीसीएल में छह दिन का सप्ताह है.

गौरतलब है कि आरएसबीसीएल ने दिनांक 8 फरवरी 2017 को एक आदेश क्रमांक 7153 महाप्रबंधक ऑपरेशन सुरेश गुप्ता द्वारा जारी किया जिसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष 2016-17 के राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति को दृष्टिगत रखते हुए माह फरवरी और मार्च के सभी अवकाश रद्द किए जाते हैं. इसमें होली के दो अवकाशों में सिर्फ धुलण्डी का अवकाश दिया गया है जबकि इससे पहले प्रबंधक प्रशासन रामबाबू अग्रवाल द्वारा 6 जनवरी 2017 को जारी आदेश संख्या 6273 में स्पष्ट है कि कॉरपोशन के डिपोज में बैंकों के अवकाश के अनुसार ही अवकाश होंगे. 

रद्द कर दिए गए कई अवकाश
राजकीय अवकाशों के अनुसार अवकाश नहीं होंगे. अवकाश रद्द करने के इस नए आदेश को एक बार अलग भी रख दिया जाए तो भी 9 नवंबर को शनिवार, 10 नवंबर को रविवार, 12 नवंबर को गुरूनानक जयंती, 17 नवंबर को रविवार को बैंकों में अवकाश होने के बावजूद कर्मचारियों और अधिकारियों की छुट्टियां क्यों रद्द की गई. आदेश के अनुसार आरएसबीसीएल में हर दूसरे और चौथे शनिवार का अवकाश होना चाहिए लेकिन यहां चौथे शनिवार का अवकाश नहीं है जबकि बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार का अवकाश रहता है.

छुट्टी दिन आते हैं कॉरपोरेशन के कर्मचारी 
अब कॉरपोरेशन के कर्मचारी छुट्टी दिन आते हैं डिपो में आकर बैठकर मक्खियां मारकर चले जाते हैं क्योंकि कॉपरपोरेशन का काम बैंकों के अनुसार चलता है. शराब का दुकानदार या बार वाला बैंक में चालान जमा कराकर शराब खरीदने डिपो पर आता है, जबकि रविवार को बैंक बंद रहने के कारण चालान जमा होते ही नहीं है. हैरान कर देने वाली बात ये है कि छुट्टियां रद्द होने के बावजूद नए आदेश में कहीं ये नहीं है कि छुट्टियों का पुनर्भरण होगा या अवकाश में काम करने के दौरान ओवर टाइम का भुगतान किया जाएगा, ये भी श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है.