राजस्थान का बिना बिजली से चलने वाला देसी फ्रिज, ठेठ गांव की शानदार कला से होता है तैयार, याद आ जाएगा बचपन

Village mitti fridge video: आपने कई ब्रांड्स के आधुनिक फ्रिज देखे होंगे, जो तरह-तरह के फीचर्स से लैस होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांवों में आज भी लोग देसी फ्रिज का इस्तेमाल करते हैं, जो बिजली नहीं, बल्कि प्राकृतिक तकनीक पर चलता है? यह अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

राजस्थान का बिना बिजली से चलने वाला देसी फ्रिज, ठेठ गांव की शानदार कला से होता है तैयार, याद आ जाएगा  बचपन
Image Credit: Village mitti fridge videoSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Desi Fridge Viral: राजस्थान के गांवों में आज भी एक ऐसी अनोखी तकनीक जीवित है, जो बिना बिजली के देसी फ्रिज के रूप में लोगों की जरूरतें पूरी करती है. यह देसी फ्रिज, ठेठ गांव की शानदार मिट्टी की कला से तैयार किया जाता है, जो न केवल सामान को ठंडा रखता है, बल्कि बचपन की यादें भी ताजा कर देता है.

फ्रिज आज लोगों की जरूरत बन चुका है, जिसके बिना साल भर आपका काम अधूरा रहता है. यह सब्जियों, फलों, डेयरी उत्पादों और अन्य चीजों को खराब होने से बचाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांवों में लोग फ्रिज का इस्तेमाल कैसे करते हैं? हालांकि गांवों में कई सालों से आधुनिक फ्रिज का उपयोग हो रहा है, फिर भी मिट्टी से बने पारंपरिक फ्रिज को आज भी कई लोग पसंद करते हैं और इस्तेमाल करते हैं.

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सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें पारंपरिक बिजली-रहित फ्रिज की झलक देखने को मिलती है. वीडियो में एक मिट्टी का बॉक्स दिखाया गया है, जिसमें लोहे का गेट लगा हुआ है. जब एक बच्चा इसे खोलता है, तो अंदर दूध, सब्जियां और कई अन्य चीजें रखी नजर आती हैं. यह मिट्टी का फ्रिज आकार में किसी छोटे आधुनिक फ्रिज जितना बड़ा है.

इस वीडियो को इंस्टाग्राम हैंडल thar_desert_photography पर शेयर किया गया है. इस देसी फ्रिज की खासियत है कि इसमें बड़े-बड़े बर्तन भी आसानी से रखे जा सकते हैं. इसकी चौड़ाई इतनी है कि कई सामान एक साथ इसमें समा सकते हैं. वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा गया है- ‘गांव का देसी फ्रिज.’

पब्लिक भी इस देसी फ्रिज को देखकर हैरान रह गई. दरअसल, यह खास तरह की मिट्टी से बनाया जाता है, जो गर्मी में भी ठंडक बरकरार रखती है. हल्के वेंटिलेशन और मिट्टी के ठंडेपन के कारण इसमें रखा सामान खराब नहीं होता. एक यूजर ने कमेंट किया, "मेरे गांव में आज भी दूध-दही के लिए इसका इस्तेमाल होता है." दूसरे यूजर ने लिखा, "कई जगह इसे भंडारिया कहते हैं. दूध-दही को बिल्ली से बचाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता था."

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Ansh Raj

Ansh Raj

अंश राज, Zee Rajasthan में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत है. राजस्थान की हर छोटी-बड़ी खबर पर पैनी नजर रखते हैं. क्राइम, पॉलिटिक्स और पावर कॉरिडोर की खबरों में खास दिलचस्पी. ऑपरेशन सिंदूर से लेकर विधानसभा चुनाव और प्रदेश के दिग्गज नेताओं के हर बयान पर नजर. हेडलाइन से खेलना, खबर की काट-छांट करने में मजा आता है. इसके अलावा कंटेंट को पैकेजिंग करके परोसना इनकी खासियत है. डिजिटल मीडिया में करीब 3 साल का अनुभव. इससे पहले Zee Uttar Pradesh/Uttarakhand और Zee Bharat के साथ काम कर चुके हैं. चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म में मास्टर्स किया है और वर्तमान में मेरठ कॉलेज से LLB की पढ़ाई कर रहे हैं. खबरों की गंध सूंघने और उसे सबसे पहले, सबसे तेज परोसने का जुनून. यही अंश राज हैं
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