राजस्थान: राखी पर पड़ा कोरोना का 'साया', फिकी हुई बाजारों की रौनक

बाजार में रंगत बिल्कुल फीकी दिखाई दे रही है. खरीदारों की चहल-पहल ना के बराबर ही दिख रही हैं. वहीं, चीन के साथ चल रहे तनाव का असर भी राखियों के बाजार पर पड़ा है.  

राजस्थान: राखी पर पड़ा कोरोना का 'साया', फिकी हुई बाजारों की रौनक
कोरोना महामारी के चलते राखी की दुकानें सूनी नजर आ रही हैं.

अमित यादव/जयपुर: रक्षाबंधन (Rakshabandhan) पर इस साल बाजार की त्यौहारी रौनक कोरोना (Corona) की भेंट चढ़ गई है. इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर उनसे अपनी रक्षा का वचन लेते हुए, उनकी लंबी उम्र की दुआएं भी मांगती है. इस त्यौहार के लिए उत्साह हर किसी के दिल में साफ दिखाई देता है.

भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के इस त्यौहार से पहले बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज जाता था. हालांकि, बाजार में राखियां बिक रही हैं, लेकिन अबकी बार बाजार की रौनक गायब हैं. क्योंकि खरीदारों में वैसा उत्साह नहीं है. कोरोना महामारी के चलते राखी की दुकानें सूनी नजर आ रही हैं.

दरअसल, राखी के पर्व का महज एक दिन शेष है. लेकिन बाजार में रौनक अब भी नहीं दिखाई दे रही हैं. आमतौर पर रक्षाबंधन से लगभग 15 दिन पहले कस्बे में तकरीबन 150 छोटी-बड़ी दुकानें, जिनमें रंग-बिरंगी राखियों से बाजार सजता-संवराता दिखता था. लेकिन इस बार कुछ नाम मात्र की दुकानें राखियों से सजी तो है पर, वहां पर भी कोरोना का असर साफ देखा जा सकता है, सिर्फ नाम मात्र के ही ग्राहक देखें जा सकते हैं.

बाजार में रंगत बिल्कुल फीकी दिखाई दे रही है. खरीदारों की चहल-पहल ना के बराबर ही दिख रही हैं. वहीं, चीन के साथ चल रहे तनाव का असर भी राखियों के बाजार पर पड़ा है. पहले जब चाइनीज सामानों के आयात पर कोई बंदिश नहीं थी तो, तरह-तरह की राखियां आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी, लेकिन इस बार उनकी भी आवक नहीं हुई है. जिसके चलते राखियों की वैरायटी सीमित रह गई है.

पहले बहने एक साथ कई तरह की राखियां खरीदकर भाई की कलाई पर सजाती थी, लेकिन इस बार तो इक्का-दुक्का ही राखियां बिक रही हैं. राखी व्यापारियों का कहना है कि, गत वर्ष राखी के त्योहार पर अच्छा व्यापार हुआ था, लेकिन इस बार व्यापार पूरी तरह से ठप पड़ा है.

वहीं, यहीं स्थिति कपड़ों की दुकानों पर भी देखी जा सकती है. इस समय साड़ी सहित अन्य कपड़ों की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ हुआ करती थी. लेकिन कोरोना महामारी का असर साफ देखा जा सकता. दिनभर में इक्का-दुक्का ग्राहक ही दुकान पर आ रहे हैं.

इस संबंध में एक साड़ी विक्रेता का कहना है कि, कोरोना के चलते बसे व जीपे बंद है. जिससे आसपास के गांवों के लोग खरीदारी करने नहीं आ रहे हैं. साथ में लोगो के मन कोरोना का भी डर है, जिस वजह से गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 30 प्रतिशत भी ग्राहकी नहीं है. जिससे स्टाफ का खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा है.