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राजस्थान में आचार संहिता हटने के बाद बेरोजगारों में जगी नौकरी की उम्मीद

अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के साथ ही प्रदेशभर के बेरोजगारों को एक बार फिर से सरकार से उम्मीद जागी है. 

राजस्थान में आचार संहिता हटने के बाद बेरोजगारों में जगी नौकरी की उम्मीद
पिछले 5 साल से अटकी हुई भर्तियों सहित नई भर्तियों पर सरकार की ओर से काम किया जाएगा.

उदयपुर: भर्तियों के अटकने के कारण अब प्रदेश के बेरोजगारों के सामने विकराल समस्या खड़ी होने लगी है. उदयपुर निवासी कैलाश चंद को करीब 5 साल से नियुक्ति का इंतजार है. कैलाश चंद के मुताबिक ऐसे में अब पारिवारिक झगड़े भी बढ़ते जा रहे हैं, पत्नी ने भी चेतावनी दे दी या तो कोई प्राइवेट नौकरी करो नहीं तो छोड़ कर पीहर चली जाएंगी. दूसरी ओर वेदप्रकाश का कहना है कि 30 साल उम्र हो चुकी है. रिश्ते भी कई आते हैं, लेकिन नौकरी नहीं होने की वजह से शादी नहीं हो पा रही है. 

कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले बेरोजगारों के एक बहुत बड़े तबके से बड़े-बड़े वादे किए थे. इसी का नतीजा निकला की कांग्रेस के समर्थन में प्रदेशभर के बेरोजगार एकजुट हो गए हैं और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत हुई थी. लेकिन सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सिर्फ थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती और व्याख्याता भर्ती की नियुक्ति प्रक्रिया को ही पूरा सकी. उसके बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता जो साढ़े तीन महीनों तक लागू रही, लेकिन अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के साथ ही प्रदेशभर के बेरोजगारों को एक बार फिर से सरकार से उम्मीद जागी है. पिछले 5 साल से अटकी हुई भर्तियों सहित नई भर्तियों पर सरकार की ओर से काम किया जाएगा.

प्रदेश की भर्तियों में प्रशासनिक लापरवाही और सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिए जाने के चलते पिछले 5 साल में करीब एक दर्जन से ज्यादा ऐसी भर्तियां हैं जिनको पूरा होने का इंतजार है. कुछ भर्तियां कोर्ट के फेर में अटकी हैं तो कई भर्तियों के सालों बीत जाने के बाद भी रिजल्ट जारी नहीं हो पाया है. इसके साथ ही कई भर्तियां ऐसी है जिन पर अभ्यर्थियों ने पद ग्रहण नहीं किया. उनकी वेटिंग लिस्ट तो निकाल दी, लेकिन वेटिंग वालों को अभी तक नियुक्ति नहीं दी गई है.

साल 2013 से लेकर अब तक करीब 60 ऐसी भर्तियां है जिनमें कहीं ना कहीं रूकावट से बेरोजगारों को समस्या झेलनी पड़ रही हैं. प्रदेश के दूर-दराज इलाकों से राजधानी में किराए पर रहकर अपनी पढाई करने वाले युवाओं को इम्तिहान में सफल होने के बाद भी दर-दर की ठोकरे खाने पर मजबूर होना पड़ रहा है. अटकी हुई भर्तियों में कोर्ट के पेंच फंसने की समस्याएं तो है ही, साथ ही प्रशासनिक लापरवाही और ढुलमुल सरकारी रवैये से बेरोजगारों की उम्मीदों को झटका लगा है. 

ये तो वो बड़ी भर्तियां हैं जिनमें करीब 1 लाख से ज्यादा भर्तियों को पूरा होने का इंतजार है. इसके साथ ही आईटीआई और बीटेक डिग्रीधारी बेरोजगारों के लिए पिछले 5 सालों में ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही भर्तियां निकाली गई है. विशेषज्ञों की मानें तो भर्तियों में सबसे बड़ा लैप्स माना जाता है प्रशासन की लापरवाही या फिर भर्तियों में कोई ना कोई ऐसी कमी छोड़ देना जिसके चलते ये भर्तियां अदालती चक्कर में अटक जाती हैं. साथ ही भर्तियों को कोर्ट से निकालने के लिए सरकार की ओर से मजबूत पैरवी नहीं करना भी एक बड़ा कारण बेरोजगार इसमें देखते हैं.

बहरहाल, सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले इन बेरोजगारों को 5 सालों से एक ही इंतजार है और वो है नियुक्ति मिलने का, लेकिन इंतजार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. सरकारी नौकरी के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं तो पहले ही मुश्किल थी, लेकिन अब इन भर्तियों में आने वाली समस्याएं और भी विकराल रूप लेती जा रही है.