राजस्थान के राज्यपाल और राजभवन की सुरक्षा में 'सुराख', हुई समीक्षा

राजभवन में भीड़ कंट्रोल, निगरानी, महामहिम के परिजनों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध पुलिस बल अपर्याप्त है.

राजस्थान के राज्यपाल और राजभवन की सुरक्षा में 'सुराख', हुई समीक्षा
प्रतीकात्मक तस्वीर.

विष्णु शर्मा, जयपुर: राजस्थान के राज्यपाल और राजभवन की सुरक्षा में 'सुराख' है. राजभवन की सुरक्षा में न तो पर्याप्त नफरी है, न ही सुरक्षाकर्मियों में एकरूपता है. इतना ही नहीं, राज्यपाल की सुरक्षा में लगे कार्मिक वीवीआईपी सुरक्षा ड्यूटी में निपुण हैं. यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि खुद खुफिया पुलिस की ओर से राज्य सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में राजभवन की सुरक्षा में कमियों का उल्लेख किया गया है. 

राजभवन की सुरक्षा में आ रही समस्याओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस मुख्यालय ने पुलिस अधीक्षक सीआईडी सुरक्षा से समीक्षा करवाई गई. एसपी ने  राज्यपाल की सुरक्षा की समीक्षा कर पिछले दिनों अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. 
- राजभवन की सुरक्षा के लिए 10 मार्च 1997 को राज्य विशेष शाखा में 28 पदों की स्वीकृति दी गई थी.

- इससे पहले वर्ष 1986 में वीवीआईपी की सुरक्षा के लिए 21 हैड कांस्टेबल, 77 कांस्टेबल के पद स्वीकृत किए थे.
- 5 जनवरी 1987 को राज्यपाल सुरक्षा दस्ते में 25 जवानों के पद दिए गए थे.
- अभी राजभवन की सुरक्षा में राज्य विशेष शाखा, पुलिस कमिश्नरेट और पुलिस दूर संचार का जाब्ता तैनात है.
- पुलिस विशेष शाखा से एक एएसपी सहित 24, कमिश्नरेट से 48 तथा दूर संचार से चार कर्मचारी तैनात है.
- विशेष शाखा के कर्मचारी पीएसओ, सीपीटी, इनर कोड की निगरानी आदि करते हैं.
- कमिश्नरेट के कर्मचारी इनके अलावा पायलेट, एस्कॉर्ट, परिसर में एक्सेस कंट्रोल, निगरानी का भी काम करते हैं.
- पुलिस दूर संचारकर्मी उपकरणों के रख रखाव के साथ पायलेट कार की देखभाल करते हैं.
- 5वीं बटालियन आरएसी के जवान राजभवन की बाहरी सुरक्षा में तैनात है.

राजभवन की सुरक्षा में ये हैं सुराख
-  राजभवन के सुरक्षा कारकेड के वाहनों पर ड्राइवर के पद स्वीकृत नहीं है.
- एक अप्रैल 2019 ड्राइवर के पद सृजित करने के लिए लिखा गया था.
-  राजभवन में भीड़ कंट्रोल, निगरानी, महामहिम के परिजनों की सुरक्षा के लिए उपलब्ध पुलिस बल अपर्याप्त है.
- राजभवन सुरक्षा प्रभारी कई बार इस ओर ध्यान आकर्षित कर चुके हैं.
- मुख्यमंत्री की सुरक्षा में एसएसडब्ल्यू ही एक मात्र नजदीकी सुरक्षा एजेंसी है, वहीं राज्यपाल की सुरक्षा में एक से अधिक एजेंसिंया लगी हाेने से व्यवहािरक नियोजन में समस्या आती है.

- राज्य सरकार के 17 दिसम्बर 2012 के नोटिफिकेशन के तहत विशेष शाखा के कर्मचारियों के चयन किया जाता है.
- चयनित कर्मचारियों का हर तीन महीने में विशेष प्रशिक्षण, रिफ्रेशर कोर्स, फायरिंग करवाई जानी चाहिए.
- कमिश्नरेट के कार्मिकों के रिफ्रेशर, विशेष प्रशिक्षण नहीं होने से वो राज्यपाल की वीवीआईपी की सुरक्षा ड्यूटी में निपुण नहीं होते हैं.
- वीवीआईपी सुरक्षा में लगे स्थायी कार्मिकों की समय-समय पर जांच की जाती है, लेकिन पुलिस कमिश्नरेट का जाब्ता स्थायी नहीं होता है, ऐसे में जांच नहीं की जाती है. यह सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है.