राजस्थानी साहित्यकार रामस्वरूप किसान को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

भारतीय भाषाओं के कुल 24 रचनाकारों के साथ किसान को अकादेमी अध्यक्ष चंद्रशेखर कम्बार ने एक लाख रुपए का चैक, गुलदस्ता व ताम्र पत्र प्रदान कर तथा शॉल ओढ़ाकर पुरस्कृत किया. 

राजस्थानी साहित्यकार रामस्वरूप किसान को मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार
रचनाकर्म पर बात कहते हुए किसान रामस्वरूप ने कहा कि उनका लेखन श्रम से सराबोर है.

नई दिल्ली: राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के परलीका ग्राम निवासी साहित्यकार रामस्वरूप किसान को मंगलवार को नई दिल्ली साहित्य अकादमी के कमानी सभागार में उनके राजस्थानी कहानी संग्रह 'बारीक बात' के लिए वर्ष 2019 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार प्रदान किया गया. भारतीय भाषाओं के कुल 24 रचनाकारों के साथ किसान को अकादेमी अध्यक्ष चंद्रशेखर कम्बार ने एक लाख रुपए का चैक, गुलदस्ता व ताम्र पत्र प्रदान कर तथा शॉल ओढ़ाकर पुरस्कृत किया. 

मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित कवि, कथाकार एवं फ़िल्म निर्देशक गुलज़ार ने पुरस्कृत साहित्यकारों को बधाई दी. सचिव के. श्रीनिवासराव ने स्वागत उद्बोधन तथा उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने समाहार वक्तव्य दिया. गौरतलब है कि किसान की अब तक एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है. इससे पहले उन्हें साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार, राजस्थानी भाषा-साहित्य एवं संस्कृति अकादेमी, बीकानेर का मुरलीधर व्यास राजस्थानी पुरस्कार सहित कई पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं.

पुरस्कृत कृति 'बारीक बात' संग्रह की कहानियां राजस्थानी साहित्य की विशिष्ट चेतना का प्रतिनिधित्व करते हुए लोक संस्कृति और आधुनिकता के द्वंद्व को चिन्हित करती हैं और नए साहित्यिक प्रतिमान स्थापित करने के लिए आगे बढ़ती है.

किसान ने मीडिया को बताया संबोधित कि उन्हें जिस भाषा में पुरस्कार मिला है, वह अभी तक संवैधानिक मान्यता को तरस रही है. इस पुरस्कार की खुशी में उनकी मातृभाषा को संवैधानिक मान्यता न मिलने के तिरस्कार का गम भी कम नहीं है, परन्तु अरसे से चला आ रहा हमारा भाषा मान्यता आंदोलन एक दिन अवश्य ही सरकार को हमारी हड़पी हुई जीभ वापस लौटाने को विवश कर देगा.

अपने रचनाकर्म पर बात कहते हुए किसान रामस्वरूप ने कहा कि उनका लेखन श्रम से सराबोर है. वह गांव के लेखक हैं तथा गांव को रचकर गांव को ही लौटा देना उनके सृजन की प्रमुख विशेषता है. वह भाषा को जीने वाले लेखक हैं और कहानी, कविता, आलोचना व अनुवाद विधा में एक साथ सृजन करते हैं.

साहित्य अकादेमी में इस अवसर पर राजस्थानी परामर्श मंडल संयोजक मधु आचार्य, एनएसडी अध्यक्ष डॉ. अर्जुनदेव चारण, राजस्थानी साहित्यकार डॉ. मंगत बादल व डॉ. सत्यनारायण सोनी सहित बड़ी तादाद में साहित्यकार व साहित्य प्रेमी मौजूद थे.