श्रीगंगानगर: बेटे के इलाज के लिए तरस रहा पिता, भामाशाहों से लगाई मदद की गुहार

बेटे को बचाने के लिए बलदेव सिंह के पास जो कुछ था, उनका खेत, घर-बार, मकान-जायजाद, उन्होंने सबकुछ बेच दिया. बेटे जेपी सिंह के गुर्दे और खराब होते जा रहे हैं.

श्रीगंगानगर: बेटे के इलाज के लिए तरस रहा पिता, भामाशाहों से लगाई मदद की गुहार
बेटे के इलाज के लिए तरस रहा पिता. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

कुलदीप गोयल/श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक परिवार पर उसके 19 साल के बेटे के इलाज का खर्च पहाड़ जैसा भारी होता जा रहा है. आलम यह ही कि जवान बेटे को बचाने के लिए बलदेव सिंह के पास जो कुछ था, उनका खेत, घर-बार, मकान-जायजाद, उन्होंने सबकुछ बेच दिया. बेटे जेपी सिंह के गुर्दे और खराब होते जा रहे हैं. दवाओं का खर्चा उठाना मुश्किल हो रहा है. बूढ़ा बाप मायूस है, मां उदास है कि आखिर अब बेटे को बचाएं कैसे?

दरअसल, कोरोना (Corona) काल में लोगों की कमाई का जरिया वैसे ही प्रभावित हुआ है. किसानों की फसलें बिक नहीं रहीं, कारोबार सुस्त है, व्यापारी-कारोबारी और खरीदार सब त्रस्त हैं. ऐसे में श्रीगंगानगर के गांव लालगढ़ में रह रहे पंजाब निवासी बलदेवसिंह और कर्मजीत कौर इन्हीं हालात में अपने जवान बेटे की जान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे है. 

पिछले 2 साल से जैसे-तैसे बूढ़े बलदेव सिंह ने अपने 19 साल के बेटे के गुर्दे का इलाज कराया. लेकिन कोरोना काल आने के दौरान करीब-करीब 10 महीने उनपर पहाड़ हो गए. आमदनी खत्म हो चुकी है. बेटे के इलाज में पंजाब में उनका जो कुछ था. वो सबकुछ या तो बिक चुका है या जो बचा भी है, वो गिरवी पड़ा हुआ है. 19 साल के जवान बेटे ने चारपाई पकड़ ली है. पिता ने जेपी का हर जगह इलाज करवाया, लेकिन सभी जगह से मायूसी ही हाथ लगी. अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपना सब कुछ बेच चुके मां बाप अब खाली हाथ हैं.

जानकारी के अनुसार, श्रीगंगानगर में जेपी सिंह का इलाज करवाने के लिए इन्हें पंजाब से लालगढ़ आना पड़ा. अब ये लोग किराए के एक छोटा से मकान में गुजर कर रहे हैं. लेकिन इन्हें अपने बेटे के इलाज की चिंता सता रही है. बलदेव सिंह के बेटे की हालत गिरती जा रही है, अब उन्हें समाजसेवी लोगों से मदद की आस है, जिससे इनका इकलौता बेटा बच सके. 

पिता बलदेव सिंह रामगढ़िया बताते हैं कि उसका 19 साल का इकलौता बेटा जेपी सिंह पिछले 2 साल से गुर्दो की बीमारी से जूझ रहा है. बचपन से वह सुन-बोल नहीं पाता था. लेकिन दिमागी रूप से जेपी बेहद तेज था. उसने 12 वीं तक पढाई भी की, जिसके बाद वह पंजाब में ही एक वर्कशॉप पर काम करने लग गया. कामकाज में भी जेपी ने कोई शिकायत नहीं होने दी. सबकुछ अच्छा चल रहा था लेकिन दो साल पहले अचानक उसके दोनों गुर्दे डैमेज हो गए जिसके बाद से ही उसने चारपाई पकड़ ली.

अपने इकलौते बेटे का इलाज करवाने के लिए उसके माता पिता ने पंजाब में अपना घर और 2 बीघा जमीन तक बेच दी. बलदेव पंजाब में टायर पंक्चर रिपेयरिंग की दुकान चलाते थे, वो भी बंद हो गई. उन्होंने बेटे का जयपुर और अमृतसर से इलाज करवाया. लेकिन इसके बावजूद जेपी को कोई फायदा दिखाई नहीं दिया. वह हर चौथे दिन श्रीगंगानगर के एक निजी अस्पताल से जेपी का डायलिसिस करवा रहे हैं. जिसकी हर सिटिंग का खर्च 5 हजार रुपए आता है. अभी तक बेटे के इलाज में बलदेव 10 लाख रुपए खर्च कर चुके हैं, अब उनके हाथ खाली हैं. बलदेव ने अब समाज से मदद की गुहार लगाई है.