पति-पत्नी और वो, इस बार 'वो' कोई महिला नहीं बल्कि आपका...

पति पत्नी और वो, ये वो और कोई नहीं आप के हाथों में चौबीस घंटे रहने वाला स्मार्ट मोबाइल फोन है.

पति-पत्नी और वो, इस बार 'वो' कोई महिला नहीं बल्कि आपका...
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: पति पत्नी और वो, ये वो और कोई नहीं आप के हाथों में चौबीस घंटे रहने वाला स्मार्ट मोबाइल फोन है. हैरान मत होइये क्यों की आप को पता भी नहीं है कि आप का यह शौक कब आप की जरूरत बन गई और कब आप के घर का कलह. अगर आप भी अपने मोबाइल को परिवार-दोस्तों से ज्यादा समय देते हैं तो आप को यह खबर जरूर देखनी चाहिए.

पति और पत्नि के बीच झगड़े और उसके बाद थाना-कचहरी तक का सफर कोई नई बात नहीं है. पिछले कुछ सालों के रिपोर्ट को खंगालने के बाद पता चला कि जिस मोबाइल फोन को आप सबसे ज्यादा करीबी मानते हैं असल में वहीं मोबाइल फोन आप को आप के प्यार (पत्नी) से अलग कर चुका है.

जिस समय आप को अपने परिवार को समय देना चाहिेए था उस समय आप अपने मोबाइल पर सोशल मीडिया पर व्यस्थ थे. इस व्यस्थता के कारण पति-पत्नी के बीच ना केवल झगड़े होते हैं अपितु दोनों को एक दूसरे के चरित्र पर शक करने को भी मजबूर हो जाते हैं. 

ऐसे उदाहरणों की भरमार है कि जब पति-पत्नी के मोबाइल पर समय बिताने को लेकर ना केवल झगड़े हुए अपितु उनका तलाक तक हो गया. जयपुर के एडिशनल कमिश्नर अशोक गुप्ता बताते हैं कि आमेर थाना इलाके में हुए एक महिला के मर्डर में भी एसी ही बात सामने आई थी कि पत्नी के फेसबुक पर 6 हजार फोलोवर्स होने के कारण वह फोन पर बिजी रहती थी, जिसके कारण पति को पत्नी पर ना केवल शक हुआ अपितु उसने उसकी निर्मम हत्या कर दी थी. थानों में आने वाले अधिकांश केसों में इसी तरह की बात सामने आती है, जिससे विवाद उपजता है फिर विछेद तक बात पहुंच जाती है.

सोशल मीडिया का दिनों दिन जीवन में बढ़ता उपयोग आप को बिना कारण व्यस्त रख रहा है, जिससे पति-पत्नी एक दूसरे पर शक करने लगते हैं. यह शक फेसबुक,वॉट्सअप और इंस्टाग्राम में आप के चित्रों पर किये गये कॉमेंट से भी पैदा हो जाता है. इस बेबुनियाद शक के कारण पति-पत्नी के बीच आये दिन झगड़े होते हैं फिर यह मामले थानों से होते हुए कोर्ट तक पहुंचते हैं. 

सीनियर एडवोकेट संदीप लुहानिया ने बताया कि तलाक वाले जो भी केस पिछले कुछ समय में आये हैं उनकी बुनियाद इस सोशल मीडिया के कारण बनी, जिसके बाद यह शक इतना गहराता गया कि एक अच्छा खासा परिवार हांसिये पर आ गया.

प्रदेश भर से आने वाले ऐसे केसों पर काम करने वाले सीनियर पुलिस अधिकारी एडीजी सिविल राइट्स रवि प्रकाश मेहरड़ा का कहना है कि वह दिनभर इसी प्रकार के मामले को सुनते हैं और देखते हैं जिसमें सबसे अधिक शिकायत इसी बात की सामने आती है कि पति पत्नी को या पत्नी पति के बीच संवाद कम होने का मुख्य कारण मोबाइल है,  जिससे दोनों के एक घर में रहने के बाद भी वह अलगाव का जीवन जीने को मजबूर है.

दूसरी ओर दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर इसी सोशल मीडिया के कारण शक करने लगते हैं. आगे चल कर इस शक को आधार भी बनाकर तलाक लिया जाता है. थानों में जितनी भी महिला सलाह केन्द्र हैं उनकी रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है कि मोबाइल का प्रयोग कलह की जड है जो दिनों दिन बढ़ती जाती है, जिससे परिवार टूट रहे हैं.

पुलिस मुख्यालय से लेकर फिल्ड और वकीलों से बात करने के बात यह तो साफ हो चुका है कि अगर आप को अपने परिवार को बचाना है तो सोशल मीडिया का कम से कम और जरूरत होने पर ही प्रयोग करें और अधिक से अधिक समय अपने परिवार और जीवन साथी को दें.