कोटा: निजी बिजली कंपनी KEDL की बढ़ी मुश्किलें, एफआईआर दर्ज कराने के आदेश

जांच में पाया गया कि शहर की कई और कॉलोनियों में भी अवैध तरीके से मीटर लगाकर, निजी बिजली कंपनी केईडीएल द्वारा सरकार को चूना लगाया जा रहा है.

कोटा: निजी बिजली कंपनी KEDL की बढ़ी मुश्किलें, एफआईआर दर्ज कराने के आदेश
जल्द की उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार, कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

मुकेश सोनी, कोटा: जिले में निजी बिजली कंपनी केईडीएल (Kota Electricity Distribution Limited) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. स्थानीय लोगों के बाद अब सरकार ने भी सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है. 

स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक उज्जवल राठौर द्वारा 15 नवंबर को पत्र जारी कर आयुक्त नगर निगम, सचिव नगर विकास न्यास एवं उपायुक्त आवासन मंडल को कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड द्वारा करोड़ों रुपये के अनाधिकृत एवं अधिक बिल जारी करने के मामले में समस्त दस्तावेजों और पुख्ता सबूतों के साथ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं. विभाग ने तीनों अधिकारियों को 15 दिवस में पालना रिपोर्ट भेजने के आदेश जारी किए हैं.

क्या है मामला?
दरअसल विभाग ने निदेशालय के मुख्य अभियंता विद्युत, नगर विकास न्यास एवं नगर निगम के अभियंताओं से केईडीएल द्वारा वर्ष 2016-17 से सितंबर 2019 तक करीब 60 करोड़ राशि के रोड लाइट के जारी किए बिल की जांच कराई थी. टीम द्वारा जांच में बिलों में मनमाने तरीके से विद्युत खपत बताकर अधिक राशि एवं अतिरिक्त मीटर लगाकर बिल जारी करने की अनियमितता पाई गई. इसके साथ जांच में पाया गया कि शहर की कई और कॉलोनियों में भी अवैध तरीके से मीटर लगाकर, निजी बिजली कंपनी केईडीएल द्वारा सरकार को चूना लगाया जा रहा है.

विभाग हुआ सख्त
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक ने नगर निगम के अधीन बिलों की जांच नगर निगम एवं केईडीएल के अधिकरियों के साथ संयुक्त रूप से की जाकर वास्तविक योग्य भुगतान का आंकलन करने एवं तब तक बिलों का भुगतान नहीं करने एवं अरबन सेस से भुगतान के लिए बिलों को प्रमाणित नहीं करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने तीनों विभागों को अपने अधीनस्थ क्षेत्रों की रोड लाइट के कनेक्शनों के बिलों की पूर्णतया जांच करके केईडीएल की लापरवाही के लिए सभी दस्तावेजों और पुख्ता सबूतों के साथ एफआईआर दर्ज करवाने एवं पूरी जांच होने तक रोड लाइट के बिलों का भुगतान नहीं करने के निर्देश दिए हैं.

क्या कहना है निगम आयुक्त का
निगम आयुक्त वासुदेव मालावत का कहना है कि उच्चाधिकारियों का पत्र मिला है. उनके निर्देश के बाद कार्रवाई शुरू की है. वहीं कार्यवाहक उपआवासन उपायुक्त आर एम कुरैशी ने बताया कि विभाग से पत्र मिलने के बाद बिलों की दोबारा जांच की जा रही है. जल्द की उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार, कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.