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अजमेर शरीफ पर चढ़े फूलों से बन रही खाद का विरोध कर रहे खादिम पर मुकदमा दर्ज

हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर चढ़ाए गए फूलों से जैविक खाद बनाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है. 

अजमेर शरीफ पर चढ़े फूलों से बन रही खाद का विरोध कर रहे खादिम पर मुकदमा दर्ज
इसी को लेकर दरगाह कमेटी ने खादिमो के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है.

अजमेर: राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर चढ़ाए गए फूलों से जैविक खाद बनाने का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है. इसी को लेकर दरगाह कमेटी ने खादिमो के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार दरगाह कमेटी के सहायक नाज़िम मोहम्मद आदिल और अन्य कर्मचारी जब पवित्र मज़ार से उतरने वाले फूलों को एकत्रित करने पहुंचे तो वहां मौजूद खादिमो ने विरोध किया और फूल नहीं उठाने दिये.

जिसके बाद दगराह कमेटी ने स्थानीए पुलिस में इसकी शिकायत कर दी. दरगाह थाने के प्रभारी कैलाश विश्नोई ने बताया कि दरगाह कमेटी की ओर से प्राप्त शिकायत पर खादिम शमीम चिश्ती ओर इच्छु मियां उर्फ इश्हाक के विरुद्ध मारपीट और राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज किया गया है. जानकारी के अनुसार पवित्र मजार पर पेश किए जाने वाले फूलों से खाद बनाने का विरोध कर खादिम अपने स्तर से फूलों को सराधना गांव में ठंडा कर रहे थे. 

इसी को लेकर दरगाह कमेटी के अध्यक्ष अमीन पठान नाज़िम शकील अहमद के साथ खादिमो कि दोनों संस्थाओ के अध्यक्ष व सचिवो की बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि खाद शब्द के स्थान पर बरकती पत्तियां नाम रखा जाएगा और दरगाह कमेटी फूलो को एकत्र करेंगी. उसी निर्णय के बाद दरगाह कमेटी ने कदम उठाया और विरोध करने वाले खादिमों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया है.

गौरतलब है कि हाल ही में अजमेर शरीफ दरगाह के फूलों से जैविक खाद बनाने का कार्य दरगाह कमेटी और हिंदुस्तान जिंक ने शुरू किया था. इस उद्धघाटन कार्यक्रम में खादिमों की अंजुमन के पदाधिकारी भी मौजूद थे और इस पहल को उन्होंने सराह भी था. यही वजह रही कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत बीते दिनों पीएम नरेंद्र मोदी से वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिए बातचीत में अंजुमन के सदर सैय्यद मोईन हुसैन चिश्ती ने कहा था कि दरगाह के दो हज़ार खादिम इस जैविक खाद के पैकेट को ज़ायरीन में बांटेंगे और हर अकीदतमंद को कहेंगे कि वो इस खाद को अपने घर के गमले में मिलाएं ताकि उनके घर मे ख्वाजा साहब के करम से सुख शांति और खुशहाली बनी रहे.

एक तरफ जहां दरगाह कमेटी के द्वारा दरगाह के फूलों से जैविक खाद का समर्थन करते हुए खादिमो की अंजुमन सदर ने ज़ायरीन को खाद के पैकेट ज़ायरीन में बांटने की बात कही तो दूसरी तरफ फूलों की बेकद्री और जैविक खाद बनाने का मामला अब बेहद तूल पकड़ता ही जा रहा है. विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह कमेटी को अब वहीं के खादिमों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है.

गौरतलब है कि दरगाह कमेटी और हिंदुस्तान जिंक के बीच दरगाह के फूलों को लेकर जैविक खाद बनाने का कार्य कायड़ विश्राम स्थल पर शुरू किया गया है. जिसमे लाखो रुपयों की मशीनें लगाई गई है. इसी के साथ साथ फूलों से तैयार हो रही जैविक खाद को किसानों को फायदे में बेचा जा रहा है. खादिमों का आरोप है कि दरगाह के फूल आस्था से जुड़े है और इन्हें अकीदतमंद बीमारियों से निजात के लिए भी ले जाते है. इसके अलावा खादिम समुदाय के लोग अपने अपने मेहमानों में इस अनमोल तबर्रुख को बांटते है. इस लिए दरगाह कमेटी को कोई हक नहीं बनता की वो दरगाह के फूलों को खाद बनाने में इस्तेमाल करें और अक़ीदत मंदो की आस्था को ठेस पहुंचाए.

खादिमों ने कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज की बारगाह में सभी धर्म के अनुयायी आते है और सबकी इन फूलों में आस्था बनी हुई है. खादिमों ने निर्णय लिया है कि मज़ार शरीफ पर हर रोज़ पेश होने वाले हज़ारो क्विंटल फूलों को दरगाह कमेटी के हवाले नहीं किया जाएगा बल्कि खादिम खुद ही इसे इस्तेमाल करेंगे. कुछ खादिमो का मानना है कि तबर्रुख के तौर पर ज़ायरीन को दिए जाने वाले फूलों से हर मर्ज का इलाज़ हो जाता है. यहां तक कि किसी भी गंभीर बीमारी से अकीदतमंद को फायदा मिलता है.

अजमेर दरगाह के फूलों से एक दो नहीं बल्कि लाखो करोड़ो लोगो की आस्था जुड़ी हुई है. यही वजह है कि पहले दरगाह के फूलों को एक बावड़ी में ठंडा यानी नमक डाल कर गला दिया जाता था. अब जबकि इन फूलों को जैविक खाद में तब्दील कर दरगाह कमेटी इसे किसानों को बेच रहे है तो इसे आस्था का मामला बता कर खादिमों का विरोध शुरू हो चुका है जो आगे चल कर बड़ा रूप ले सकता है.