राजस्थान विधानसभा में गहलोत सरकार का फ्लोर मैनेजमेंट फेल, हुआ जोरदार हंगामा

सरकार का फ्लोर मैनेजमेंट तब फेल नजर आया जब सदन में विधायकों की कम संख्या को देखते हुए विपक्ष ने राजस्थान विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग कर डाली. 

राजस्थान विधानसभा में गहलोत सरकार का फ्लोर मैनेजमेंट फेल, हुआ जोरदार हंगामा
राठौर ने सदन में चिल्लाते हुए कहा कि सदन के सभी दरवाजे तुरंत बंद कराया जाएं.

जयपुर: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को सरकार का फ्लोर मैनेजमेंट तब फेल नजर आया जब सदन में विधायकों की कम संख्या को देखते हुए विपक्ष ने राजस्थान विनियोग विधेयक पर मत विभाजन की मांग कर डाली. सभापति के इस मांग को ठुकराए जाने पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ और बीजेपी विधायकों ने बायकाट कर अपना विरोध जताया. हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल का दावा था कि सदन में कांग्रेस के विधायकों की संख्या बीजेपी के विधायकों की संख्या से दोगुनी थी.

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विधायकों का सदन से बाहर रहना सरकार को महंगा पड़ जाता लेकिन सभापति के फैसले के कारण संकट टल गया. दरअसल, राजस्थान विनियोग विधेयक को पारित करते समय विपक्ष ने मत विभाजन की मांग कर ली. उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि यह वित्त विधेयक है और सदन में सरकार अल्पमत में आ गई है इसलिए इसको भंग किया जाए. 

राठौर ने विधानसभा में चिल्लाते हुए कहा कि सदन के सभी दरवाजे तुरंत बंद कराया जाए और विधायकों की संख्या कि नहीं जाए. आसन पर मौजूद सभापति राजेंद्र पारीक भी कुछ देर के लिए असहज नजर आए और वह विधेयक को पारित कराने के लिए बार-बार हां और ना बुलाते रहे. इसी बीच कांग्रेसी विधायकों में अफरा-तफरी नजर आई और वे विधानसभा के कमरों से भागकर सदन में पहुंचे.

इस बीच संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल ने सत्ता पक्ष की तरफ से मोर्चा संभाला उन्होंने कहा कि सदन में हमारे विधायकों की संख्या विपक्ष के विधायकों की संख्या से दोगुनी है और चाहे तो वोटिंग करा लें. इस बीच बीजेपी की विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करते हुए मत विभाजन की मांग करते रहे. लेकिन सभापति राजेंद्र पारीक ने उनकी मांग नहीं मानी. इसी बीच शांति धारीवाल ने फिर कहा कि बीजेपी के विधायक मुट्ठी भर है और फिलहाल इनकी संख्या 28 है. हमारे कांग्रेस के विधायक 56 मौजूद है. धारीवाल ने यह भी टिप्पणी की कि बीजेपी के कैलाश मेघवाल भी हमारे साथ है. इस बीच सभापति ने ध्वनिमत से विधायक को पारित करा दिया तो बीजेपी के विधायकों ने नारेबाजी करते हुए विधानसभा से बायकॉट कर दिया.

वित्त विधेयक पर यदि मतदान हो जाता है और उस दौरान सदन में सत्तापक्ष की संख्या कम होती है तो सरकार अल्पमत में आ जाती है, उसे इस्तीफा देना पड़ता है. पिछले कई दिनों से देखा जा रहा है कि सदन की कार्यवाही के दौरान अधिकांश विधायक नदारद रहते हैं. कई बार तो स्थिति ऐसी होती है कि 12 मंत्री ही सदन में नजर आते विपक्ष पहले भी कई मुद्दों पर मत विभाजन की मांग कर चुका है, लेकिन उनकी मांग ठुकरा दी गई. 

बुधवार को भी सदन में विधायकों की कम संख्या देखकर उप नेता प्रतिपक्ष ने रणनीति के तहत मत विभाजन की मांग उठा ली. आज के इस वाकये के बाद एक बार फिर सदन में फ्लोर मैनेजमेंट की कलई खुल गई. मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक के बार-बार कहने के बावजूद कांग्रेसी विधायक सदन में मौजूद नहीं रहते. अब देखना यह है कि आज के इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष सदन में भविष्य के लिए क्या रणनीति बनाता है.