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छात्रसंघ चुनाव 2019 में जीत के लिए बन रही रणनीति, जाति के आधार पर उतारे गए हैं उम्मीदवार

इस बार भी विश्वविद्यालय में टिकट वितरण में ऐसा देखने को मिल रहा है. दोनों ही संगठनो ने अपने पैनल में चारों प्रभावी जातियों को टिकट बांटकर प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है. 

छात्रसंघ चुनाव 2019 में जीत के लिए बन रही रणनीति, जाति के आधार पर उतारे गए हैं उम्मीदवार
यूनिवर्सिटी में इस साल कुल 23 हजार 853 वोटर्स हैं. (फाइल फोटो)

जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय में एक बार फिर से दोनों ही प्रमुख संघटनों ने जातिगत समीकरणों को देखते हुए टिकटों का वितरण किया है. इस चुनाव में जीत के लिए छात्र संगठन जाति आधारित समीकरण को ध्यान में रखकर आगे की रणनीति बना रहे हैं.

इस बार भी विश्वविद्यालय में उम्मीदवारों के चयन में ऐसा देखने को मिल रहा है. दोनों ही संगठनो ने अपने पैनल में चारों प्रभावी जातियों को टिकट बांटकर प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है. 

एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर अमित बडबडवाल, उपाध्यक्ष पर दीपक कुमार, महासचिव पद पर अरूण शर्मा और संयुक्त सचिव पर किरण मीणा को उम्मीदवार घोषित किया है. वहीं, एनएसयूआई ने अध्यक्ष पर उत्तम चौधरी, महासचिव पद पर महावीर गुर्जर, उपाध्यक्ष पद पर प्रियंका मीणा और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्मी प्रताप खंगारोत को टिकट दिया है.

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सबसे महत्पवूर्ण मानी जाने वाली अध्यक्ष पद के लिए दोनों संगठनों ने लगातार दूसरे वर्ष भी जाट प्रत्याशी को मैदान में उतार कर जातिवाद के समीकरणों को साधने का प्रयास किया है. माना जाता है कि विश्वविद्यालय में सर्वाधिक जाट और फिर मीणा जाति के छात्र मतदाता हैं. ऐसे में इन दोनों जातियों से ही बीते कुछ सालों से टिकट दिया जाता रहा है.

बता दें, यूनिवर्सिटी में इस साल कुल 23 हजार 853 वोटर्स हैं. जानकारों के अनुसार, इसमें सबसे अधिक करीब 8 हजार जाट वोटर्स है. जबकि चार हजार मीणा वोटर्स हैं. इसके अलावा 12 फीसदी एसटी, 16 फीसदी एससी और एसबीसी के 5 फीसदी वोटर बताए जा रहे हैं. बाकि मतदाता सामान्य वर्ग के है.