राजस्थान में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की अनूठी प्लानिंग

वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग एक अनूठी प्लानिंग पर काम कर रहा है. 

राजस्थान में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग की अनूठी प्लानिंग
उदयपुर वन रेंज में वन विभाग आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार दे रहा हैै.

जयपुर: राजस्थान में वन्यजीवों के शिकार की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है. ऐसे में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग एक अनूठी प्लानिंग पर काम कर रहा है. अब वन्य क्षेत्र और उसके आस-पास के इलाकों में रहने वाले लोगों को वन्यसम्पदा से जोड़ने के साथ-साथ स्वरोजगार की तरफ अग्रसर करने की कोशिश है. 

अक्सर आपने वन्यजीवों के शिकार या फिर वन्यक्षेत्रों में अवैध खनन की खबरों के बारे में सुना होगा. अब इन सभी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए वन विभाग प्रदेश की वन सुरक्षा समितियों के जरिए वनों के संरक्षण और संवर्धन पर काम कर रहा है. वन विभाग अब अपने खुफिया तंत्र को मजबूत करने के साथ साथ जंगलों और जंगल के आस-पास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों को रोजगार भी दे रहा है.

राजस्थान वन विभाग इस प्रोजेक्ट की प्रायोगिक स्तर पर शुरूवात भी कर चुका है. उदयपुर वन रेंज में वन विभाग आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार दे रहा हैै. वन सुरक्षा समितियों के जरिए वन विभाग ग्रामीण परिवारों से हर्बल गुलाल, इत्र, एलोविरा ज्यूस, अगरबत्ती, जैसे प्रोडेक्ट तैयार करवा रहा है. ये प्रोडेक्ट 100 फीसदी जैविक तरीके से तैयार किए जा रहे हैं.

जंगल में रहने वाले वन्यजीवों संरक्षण के साथ-साथ वन विभाग जंगलों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीणों के उत्थान के लिए इस कार्ययोजना पर कार्य कर रहा है. वन विभाग नें इस प्रोग्राम को वन राज नाम दिया है. वनराज स्कीम के तहत वनों में उगने वाली वनस्पतियों को बचाने के साथ-साथ उनके सवर्धन पर भी फोक्स किया जा रहा है.

फोरेस्ट डिपार्टमेंट के इन प्रोडेक्टस की सेल बाजार में ही नही ई-मार्केट में भी हो रही है. विभिन्न ई-मार्केटिंग पोर्टलस पर ये प्रोडेक्ट्स उपलब्ध हैं. इन प्रोडेक्ट्स के जरिए वन सुरक्षा समितियों को अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है.