सिरोही: तुलसी जी को ब्याहने आए भगवान शालिग्राम, खूब मिला दान-दहेज

अग्नि को साक्षी मानकर तुलसी का विवाह शालिग्राम भगवान के साथ करवाया गया तथा उनको सात फेरे के बंधन में भी बांधा गया.

सिरोही: तुलसी जी को ब्याहने आए भगवान शालिग्राम, खूब मिला दान-दहेज
तुलसी जी के पक्ष से यानी वधू पक्ष से कन्या दान भी दिया गया.

साकेत गोयल, सिरोही: वैसे तो आपने कई विवाह देखे होंगे लेकिन घर के अंदर ही दूल्हा-दुल्हन मौजूद हों और उनकी पूरी परंपरा से शादी होते हुए शायद ही आपने देखा होगा. जी हां, इसमें बाराती भी थे तो तो घराती भी. महिला संगीत भी था तो दावत भी, लेकिन यह विवाह इंसानों का नहीं था.

तुलसी जी और शालिग्राम जी का था. इस विवाह में कन्या थी तुलसी जी और वर थे खुद शालिग्राम भगवान. ये विवाह हुआ है सिरोही जिले के स्वरूपगंज में. इस विवाह के साक्षी अनेक शहरवासी बने.

सिरोही जिले के स्वरूपगंज में तुलसी जी का विवाह शालिग्राम भगवान से करवाया गया. इस विवाह में तुलसीजी को शालिग्राम भगवान के साथ सात फेरे दिलवाए गए. ये विवाह उसी अंदाज में आयोजित किया गया, जिस तरह अन्य विवाह किए जाते हैं. बाकायदा शालिग्राम भगवान बैंड-बाजों के साथ बारात लेकर मंदिर से तुलसी जी के यहां लाए गए तथा कन्या पक्ष की ओर से बारात का जमकर स्वागत किया गया. यहां इस विवाह में महिला संगीत की रस्म भी अदा की गईं. 

दिया गया दान-दहेज
इतना ही नहीं, अग्नि को साक्षी मानकर तुलसी का विवाह शालिग्राम भगवान के साथ करवाया गया तथा उनको सात फेरे के बंधन में भी बांधा गया. तुलसी जी के पक्ष से यानी वधू पक्ष से कन्या दान भी दिया गया. 

विशाल भोज का आयोजन किया गया
कन्या पक्ष की ओर से यहां विशाल भोज का आयोजन किया गया, जिसमें लोगों ने यहां खुशी-खुशी प्रसाद ग्रहण किया. इस सबके बाद विदाई की रस्म भी यहां देखी गई. तुलसी जी की विदाई के समय यहां अनेक आंख नम पाई गईं. लोगों ने तुलसीजी को अपनी पुत्री की तरह जब विदा किया तो माहौल गमगीन हो गया.