जयपुर एयरपोर्ट पर नहीं थम रही गोल्ड स्मगलिंग, मार्च में 1 करोड़ का सोना बरामद

इसके लिए राज्य की एजेंसियों के इनपुट की भी मदद लेने की भी तैयारी की जा रही है. स्मगलर अलग अलग तरीके, तस्करी के लिए अपना रहे हैं, ताकि एयर इंटेलीजेंस टीम की निगाहों में आने से बच सकें.

जयपुर एयरपोर्ट पर नहीं थम रही गोल्ड स्मगलिंग, मार्च में 1 करोड़ का सोना बरामद
लगातार बढ़ रही तस्करी पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने चिंता जाहिर की है.

जयपुर: राजस्थान के जयपुर एयरपोर्ट से सोना तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन विदेशी बाजार से यहां सोना सप्लाई करने वाले तस्कर केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियों से दूर हैं. सोना तस्करी पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियां विशेष प्लान बना रही हैं. मकसद यही है कि तस्करी की जड़ खत्म की जाए. 

इसके लिए राज्य की एजेंसियों के इनपुट की भी मदद लेने की भी तैयारी की जा रही है. स्मगलर अलग अलग तरीके, तस्करी के लिए अपना रहे हैं, ताकि एयर इंटेलीजेंस टीम की निगाहों में आने से बच सकें. अंतराष्ट्रीय आगमन पर लगाए गए बॉडी स्कैनर और यात्रियों की गतिविधि से अब तक अधिकतर मामले पाए गए हैं. यात्रियों के मलद्वार, बैग्स में लोहे की रिंग, प्रेस, टार्च, फुटवियर सहित कई अन्य जगहों पर छिपाकर सोना तस्करी के मामले सामने आ रहे हैं. 

लगातार बढ़ रही तस्करी पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने चिंता जाहिर की है. डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस, कस्टम विभाग और आयकर विभाग सहित केंद्रीय खुफिया सूचना एंजेसिंयों के सक्रिय होने के बावजूद अंतराष्ट्रीय स्तर पर रैकेट चला रहे सरगना पकड़ से बाहर हैं. विदेशों से सोना तस्करी कर करोड़ों रुपए की चपत राजस्व में लगाई जा रही है. वर्ष 2011 से 2018 तक कस्टम्स ने प्रदेश में सोने की तस्करी के 137 मामले पकड़े और 30 करोड़ का 100 किलो सोना बरामद किया. 

पिछले एक साल में कस्टम विभाग ने 55 मामलों में 36 किलो सोना पकड़ा था. इसकी कीमत 12 करोड़ रुपए से अधिक है. वहीं इंटरनेशनल सर्वे एजेंसी मेटल फोकस के अनुसार भारत में ऊंची आयात शुल्क दरों से बचने के लिए सोने की स्मगलिंग का जोर है. तीन साल में भारत में 580 टन सोने की वैध अथवा अवैध तरीके की स्मगलिंग की गई जिसका मूल्य लगभग 1.65 लाख करोड़ रुपए है. इसके लिए देशभर के एयरपोट्स का इस्तेमाल प्रमुखता से हो रहा हैं. 

इनमें मुंबई, कलकत्ता, अहमदाबाद, दिल्ली, बैंगलुरू सहित जयपुर का भी नाम शामिल है. कस्टम विभाग के अधिकारियों ने ऑफ कैमरा यह भी स्वीकार किया कि कोशिश सौ फीसदी मामलों को पकड़ने की होती है लेकिन कई बार लोग पर्याप्त जांच और सर्तकता के बाद भी कैमरों, बॉडी स्कैन से बच कर निकल जाते हैं. तस्करी के पिछले एक साल में सामने आए मामलों में उन लोगों का इस्तेमाल किया गया जो खाड़ी देशों में मजदूरी करने गए थे या बेहद गरीब परिवार से थे. उन्हें सोना देने और लेने वाले की कोई जानकारी नहीं थी. 

लगातार बढ़ रही तस्करी पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने चिंता जाहिर की है. अब डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यु इंटेलिजेंस, कस्टम विभाग और आयकर विभाग सहित केंद्रीय खुफिया सूचना एंजेसिंयों के साथ मिलकर बेनकाब करने की तैयारी में हैं. अब तक केवल कूरियर ब्वॉय के रुप में यात्री हाथ लगे हैं लेकिन विदेश में बैठकर भारत मे सोना भेजने वाले मुख्य आरोपी पकड़ से बाहर हैं. विभाग के अधिकारियों की माने तो जल्द ही इस अंतराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा होगा और तस्कर शिंकजों में होंगे.