close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

खुशखबरी: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में फिर अव्वल रहा राजस्थान, सरकार देगी पुरस्कार

राजस्थान में बेटियों के जन्म के बाद परिवार उस मासूम को बोझ समझने लगता है, कई बार तो ऐसा होता है बेटियों को कोख में मार दिया जाता है. 

खुशखबरी: बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना में फिर अव्वल रहा राजस्थान, सरकार देगी पुरस्कार
इस अभियान का सबसे अधिक असर नागौर और जोधपुर में देखा गया.

जयपुर: समाज में बेटियों को अभिशाप माना जाता था. खासकर हरियाणा और राजस्थान में लोगों की मानसिकता इतनी खराब थी कि परिवार में पैदा होने वाली बेटियां बोझ बनने लगी थी लेकिन समय बदला और समाज में एक नई क्रांती आई. यह क्रांति हरियाणा से शुरू हुई. हरियाणा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ बेटी पढाओं मिशन की शुरूआत की, जिसके बाद राजस्थान में जो बदलाव हुआ, उसके बाद इतिहास ही बदल गया. 

राजस्थान में बेटियों के जन्म के बाद परिवार उस मासूम को बोझ समझने लगता है, कई बार तो ऐसा होता है बेटियों को कोख में मार दिया जाता है. लेकिन बेटी बचाओ बेटी पढाओं के बाद राजस्थान के कई जिलों की तस्वीर बदलने लगी है. अब राजस्थान को ये समझ आने लगा है कि बेटियां परिवार के लिए बोझ नहीं, बल्कि परिवार की लक्ष्मी हैं. इसलिए लगातार तीसरे साल राजस्थान को बेस्ट अवॉर्ड के लिए चुना गया है. केंद्र सरकार की ओर से 7 अगस्त को राजस्थान को पुरस्कृत किया जाएगा.

इस अभियान का असर नागौर और जोधपुर में देखा गया, जिसके बाद में इन दोनों को भी राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है. नागौर में 2011 में जहां लिंगानुपात 897 था, वहीं अब 1000 पुरूषों पर बढ़कर 971 तक पहुंच गया है. वहीं जोधपुर की बात करे 2011 में लिंगानुपात 891 में था, वहीं अब 1 हजार पुरूषों पर बढ़कर 954 तक पहुंच गया है. इसलिए इन दोनों जिलों को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चुना गया है. इनके अलावा दूसरे जिलों में लिंगानुपात में बहुत सुधार हुआ है.
 

इससे पहले सीकर और झुनझुनू भी लिंगानुपात के मामले में बदनाम था, लेकिन बेटी बचाओ बेटी पढाओं मिशन से अब तस्वीर बदलने लगी है. अब हम उम्मीद यही रखते हैं कि बाकी दूसरे जिले भी इनसे सीख लें, ताकि राजस्थान के माथे से इस कलंक को हमेशा के लिए मिटा सकें.