सरकार ने दी राहत, सरकारी बाबू बने शामत, EWS सर्टिफिकेट बनाने में कर रहे आनाकानी

सवर्ण आरक्षण मामले में सामान्य वर्ग के लिए प्रदेश सरकार ने संपत्ति संबंधी प्रावधान हटाकर भले ही बड़ी राहत दी हो, लेकिन कोटा में बाबुओं की ज़िद सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है.

सरकार ने दी राहत, सरकारी बाबू बने शामत, EWS सर्टिफिकेट बनाने में कर रहे आनाकानी
EWS सर्टिफ़िकेट के लिए युवा दर-दर भटकने पर मजबूर

कोटा: सवर्णों को मिलने वाले आरक्षण में स्थाई सम्पत्ति सम्बंधी अनिवार्यता में छूट के प्रावधान गहलोत सरकार ने किए तो, लगा कि आर्थिक रूप से पिछड़े हर युवा को इसका फायदा होगा, लेकिन सरकार की कोशिशों पर सरकारी बाबू ही पानी फेर रहे हैं. कोटा उपखण्ड कार्यलय में आज भी EWS सर्टिफ़िकेट के लिए युवा दर-दर भटकने पर मजबूर हैं. यहां के बाबुओं को EWS को लेकर सरकार के जारी नए नियम शायद नज़र नहीं आ रहे हैं.
बेरोज़गार युवा सर्टिफिकेट के लिए दफ़्तरों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो रहे हैं. आर्थिक आधार पर दस फ़ीसदी आरक्षण के प्रावधान उपखण्ड कार्यालय के बाबुओं को या तो पता नहीं या वो इसपर नजर नहीं डालना चाहते. इसी तरह कार्यालय पहुंचे एक युवा हर्षित खंडेलवाल ने बताया कि EWS सर्टिफ़िकेट का फ़ार्म आवेदन किए हुए एक महीने से ज़्यादा का वक़्त हो गया है, लेकिन नियमों से परे यहाँ के बाबुओं की बदौलत आज भी वो दफ़्तरों के चक्कर काट रहे हैं. हर्षित ने ये भी बताया कि नियमों की पालना और सभी दस्तावेज़ों को जमा कराने के बाद भी बाबू कोई न कोई ऑबजेक्शन लगाकर काम रोक दे रहे हैं. जानकारी के मुताबिक दफ्तर में बैठे बाबू अपने ही बनाए नियमों के साथ लोगों को सरकारी सिस्टम में उलझा कर परेशान करने में जुटे हैं.
आपको बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से सवर्णो को आर्थिक आधार पर दस फ़ीसदी आरक्षण देने के बाद राज्य सरकार के आठ लाख की सीमा की पात्रता पर आरक्षण देने के आदेश के बावजूद भी पात्र लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है. सूबे की सरकार ने स्थाई सम्पत्ति सम्बंधी अनिवार्यता में छूट के प्रावधान से जुड़े आदेश तक जारी कर दिेए हैं फिर भी सरकारी बाबुओं ने घालमेल कर के व्यवस्था खराब कर दी है.