टोंक: प्रशासन चुनावों में व्यस्त, बजरी माफियाओं की मौज

 सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद टोंक जिले की बनास नदी में अवैध बजरी खनन, परिवहन और भंडारण का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है.

टोंक: प्रशासन चुनावों में व्यस्त, बजरी माफियाओं की मौज
अवैध बजरी भरकर आ रही एक ट्रैक्टर ट्रॉली ओवरलोड होने से ट्रैक्टर सीधा खड़ा हो गया.

टोंक: सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद टोंक जिले की बनास नदी में अवैध बजरी खनन, परिवहन और भंडारण का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है. पिछले एक पखवाड़े से अधिक समय से जिले मेंं प्रशासन और पुलिस के पंचायत आम चुनावों में व्यस्त होने के चलते माफियाओं की मौज हुई है. हालात यह है कि पुलिस एवं प्रशासन की इस व्यस्तता का फायदा उठाकर सैकड़ों ट्रैक्टर ट्रॉलियों और डंपर बनास नदी से अवैध बजरी भरकर दिन-रात बैखौफ होकर गुजर रहे हैं. 

वहीं, कई जगहों पर अवैध बजरी का भंडारण करने में भी जुटे हुए हैं. इतना ही नहीं अवैध बजरी परिवहन के दौरान माफियाओं को जान की परवाह तक नहीं है. उपखंड क्षेत्र के कठमाणा में अवैध बजरी भरकर गुजर रहा एक डंपर सुबह के समय अंसतुलित होकर पेड़ से टकराते हुए नाली में जा फंसा, जिसके बाद वहां अवैध बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों की रेलमपेल लग गई, जिसे बाद में क्रेन से निकाला गया. 

वहीं, अवैध बजरी से भरी ट्रैक्टर ट्रालियां दूसरे रास्ते से निकल गई. छोटी ककराज स्थित बनास नदी में अवैध बजरी को परिवहन को लेकर काफी संख्या में वाहनों का जमावड़ा नजर आया. अवैध बजरी भरकर आ रही एक ट्रैक्टर ट्रॉली ओवरलोड होने से ट्रैक्टर सीधा खड़ा हो गया. गनीमत यह रही कि ट्रैक्टर चालक बाल-बाल बचा गया. इसके बाद बजरी माफियाओं ने मशीन के सहयोग से ट्रैक्टर को सीधा किया.
  
नाके बनने के बावजूद कोई विशेष कार्रवाई नहीं
पीपलू उपखंड क्षेत्र के नानेर और झिराना में एसआईटी के नाके बनाकर वहां कार्मिकों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन इन नाकों के शुरु किए जाने के एक माह में कोई विशेष कार्रवाई नहीं हुई है. इतना ही नहीं नाकों पर नियुक्त किए गए पटवारी तो उन नाकों पर ड्यूटी करने नहीं पहुंचे हैं. जिला पटवार संघ ने तो जिला कलेक्टर से नाकों पर टेंट, चाय, गर्म पानी, सर्दी में अलावा तापने आदि की व्यवस्था नहीं किए जाने तक नाकों पर नहीं पहुंचने तक का ज्ञापन दिया था. ऐसे में यह एसआईटी के यह नाकें निष्क्रिय ही साबित हुए हैं.