जयपुर: अब नहीं कर सकेंगे टैक्स चोरी, ये एप्लीकेशन रखेगी आपके हर ट्रांजैक्शन पर नजर

अलग-अलग कंपनियों का गठन और विभागों को गलत सूचनाएं देकर टैक्स चोरी आम बात हो गई है. ऐसे में कारोबारी अलग-अलग विभागों में अलग-अलग सूचनाएं देकर टैक्स चोरी नहीं कर सकेगा.

जयपुर: अब नहीं कर सकेंगे टैक्स चोरी, ये एप्लीकेशन रखेगी आपके हर ट्रांजैक्शन पर नजर
कारोबारी अलग-अलग विभागों में अलग-अलग सूचनाएं देकर टैक्स चोरी नहीं कर सकेगा.

जयपुर: कर व्यापारी और कारोबारी अब टैक्स चोरी करने से पहले कई बार सोचेंगे. सभी केंद्रीय कर एजेंसियों ने राज्य के कर विभागों के साथ मिलकर एक साझा एप्लीकेशन तैयार की है, जिसके जरिए कारोबारियों की वास्तविक सूची, कारोबार की स्थिति और भंडारण के साथ विभिन्न एजेंसियों को दिए गए कर की जानकारी शामिल होगी. 

दरअसल, अलग-अलग कंपनियों का गठन और विभागों को गलत सूचनाएं देकर टैक्स चोरी आम बात हो गई है. ऐसे में कारोबारी अलग-अलग विभागों में अलग-अलग सूचनाएं देकर टैक्स चोरी नहीं कर सकेगा.

सरकार माल एवं सेवा कर की चोरी रोकने के लिए प्रवर्तन उपायों को सख्त करने की तैयारी कर रही है. इसके तहत केंद्र और राज्य सरकारों के कर अधिकारी प्रवर्तन कार्रवाई के लिए करदाताओं के बारे में सूचनाओं को साझा करेंगे. अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने केंद्र और राज्यों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एप्लीकेशन जारी की है. इससे जीएसटी चोरी के मामलों के प्रवर्तन कार्रवाई करने में मदद मिलेगी. यह खूफिया जानकारी को साझा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. 

केंद्र और राज्यों का नियंत्रण पचास फीसदी का है
अभी राज्यों के कर अधिकारी डेढ़ करोड़ रुपये से कम के सालाना कारोबार के करीब 90 प्रतिशत मामलों को देखते हैं. वहीं, डेढ़ करोड़ से कम के कारोबार के शेष दस प्रतिशत मामले केंद्रीय कर अधिकारी देखते हैं. वहीं, ऐसे आयकरदाता जिनका सालाना कारोबार डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक है, उनमें केंद्र और राज्यों का नियंत्रण पचास फीसदी का है. किसी तरह की खामी को दूर करने के लिए केंद्रीय और राज्य सरकार के अधिकारियों ने जीएसटी रिफंड के दावों की अधिक गहराई से छानबीन करने, अनिवार्य रूप से सभी फर्जी दावों की जांच करने और आयकर अधिकारियों और जीएसटी अधिकारियों के बीच संयोजन बढ़ाने का फैसला किया था. 

यह भी तय किया गया है कि जीएसटी नेटवर्क, सीबीआईसी और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड तिमाही आधार पर आंकड़ों को साझा करेंगे ताकि किसी तरह की गड़बड़ी को शुरू में ही पकड़ा जा सके. राजस्थान की इकाई भी इस दिशा में तेज़ी से काम कर रही हैं. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर राजस्व में आई कमी भी टैक्स एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं. जल्द ही इस डेटा के आधार पर छापेमारी की जा सकती हैं.