जयपुर: बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को लेकर रियल एस्टेट के लिए गाइडलाइंस जारी

हाईकोर्ट आदेश की पालना करने और रियल एस्टेट में चल रहे अनिश्चित्ता के माहौल को दूर करने के लिए अशोक गहलोत के आदेश पर नगरीय विकास मंत्री के नेतृत्व में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की गाइडलाइंस बनाई गई है.

जयपुर: बहुमंजिला इमारतों के निर्माण को लेकर रियल एस्टेट के लिए गाइडलाइंस जारी
गाइडलाइन्स में बहुमंजिला इमारतें बन सकेंगी इसे लेकर जिक्र किया गया है.

जयपुर: रियल एस्टेट क्षेत्र को मंदी से उबारने के उद्देश्य से प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की मंजूरी के बाद नगरीय विकास विभ्नाग ने बहुमंजिला इमारत के निर्माण के लिए बहुप्रतीक्षित गाइडलाइन्स जारी कर दी है. गाइडलाइन्स में कहां और किन पैरामीटर्स के अनुसार बहुमंजिला इमारतें बन सकेंगी इसे लेकर जिक्र किया गया है.

जाहिर है, चर्चित गुलाब कोठारी प्रकरण में हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2017 को आदेश जारी किया था. इस आदेश में कहा गया था कि गहलोत सरकार शहरों में बहुमंजिला इमारतें तय करने के लिए जोनल डवलपमेंट प्लान या मास्टरप्लान में स्थान निर्धारित करे. साथ ही, मौजूदा कॉलोनियों में रह रहे निवासियों के अधिकार पर प्रतिकूल असर डालते हुए इन इमारतों की स्वीकृति नहीं दी जाए. 

इस आदेश के बाद शहरी निकायों ने बहुमंजिला इमारतों की स्वीकृति देना बंद सा कर दिया है. इसके चलते बिल्डर्स के कई प्रोजेक्ट्स भी अटक गए हैं. ऐसे में हाईकोर्ट आदेश की पालना करने और रियल एस्टेट में चल रहे अनिश्चित्ता के माहौल को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आदेश पर नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल के नेतृत्व में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की गाइडलाइन्स बनाने का काम शुरू किया गया. लगातार चले बैठकों के दौर के बाद मंत्री शांति धारीवाल  की स्वीकृति के बाद बहुमंजिला इमारतों के निर्माण की गाइडलाइन्स जारी की गई है.

गहलोत सरकार की ओर से जारी की गई इन गाइडलाइन्स में नए इलाकों के साथ ही मौजूदा बसावट वाले इलाकों में भी बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का प्रावधान रखा गया है. इसके पीछे सरकार का तर्क है कि इससे जहां दूर दराज के इलाकों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने के भारी खर्च से मुक्ति मिलेगी. वहीं, शहरों का बेतरतीब विस्तार रोकते हुए उनके कॉम्पैक्ट डवलपमेंट में भी मदद मिलेगी. इसके अलावा ऐसी इमारतों के निर्माण के कारण कॉलोनी के दूसरे निवासियों को किसी तरह का नुकसान नहीं हो, इसके लिए कई प्रावधान पहले से अधिक सख्त किए गए हैं.