डीडवाना: सूख गई खेजड़ी को हरा करने के लिए 65 वर्षीय बुजुर्ग कर रहे दंडवत यात्रा

खेजड़ी के नीचे बैठकर मांगी हर मनोकामना पूर्ण होती है लेकिन पिछले दिनों किसी कारणवश यह पेड़ सूख गया, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालु निराश हैं.

डीडवाना: सूख गई खेजड़ी को हरा करने के लिए 65 वर्षीय बुजुर्ग कर रहे दंडवत यात्रा
पेशे से चिकित्सक डॉ. गुलाब सिंह करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं.

हनुमान तंवर, डीडवाना: गुलाब सिंह जयपुर से दंडवत यात्रा कर जैसलमेर के तनोट माता मंदिर के लिए पिछले 4 महीनों में अब तक डीडवाना के नजदीक पहुंचे हैं. भक्ति में शक्ति होती है और इसी शक्ति को आजमाने के लिए एक करोड़पति डॉक्टर इन दिनों एक ऐसा काम कर रहा है, जिसको लेकर उसकी चर्चा जयपुर से लेकर सीमावर्ती जिले जैसलमेर तक है. 

दंडवत यात्रा करते दिख रहे ये लोग कोई पदयात्री या साधु सन्यासी नहीं हैं, न ही कोई ऐसे व्यक्ति, जिनकी मन्नत पूरी होने पर दंडवत यात्रा कर रहे हैं. तस्वीरों में नजर आ रहे यह 65 वर्षीय बुजुर्ग हैं. पेशे से चिकित्सक डॉ. गुलाब सिंह जो करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं और 1060 किमी की दंडवत यात्रा पर जयपुर से तनोट राय जा रहे हैं. यह यात्रा पूरी करने में इन लोगों को दो साल लगेंगी. इनको विश्वास है कि यात्रा पूर्ण होने पर ऐसा चमत्कार होगा कि दुनिया चकित रह जाएगी.

दरअसल, देशनोक करणी माता मंदिर के नजदीक ही एक स्थान है, उसे नेहड़ी धाम कहा जाता है. कहते हैं कि करणी माता सबसे पहले यहीं पर आई थी और उसके बाद देशनोक बसाया था. यहां खेजड़ी के एक प्राचीन वृक्ष को लेकर मान्यता है कि करणी माता ने खुद बिलोना करने की नेहड़ी को यहां खेजड़ी बना दिया था, जिसके बाद इस खेजड़ी के पेड़ को लोग वटवृक्ष की तरह मान्यता रखते हैं.

मान्यता है कि इस खेजड़ी के नीचे बैठकर मांगी हर मनोकामना पूर्ण होती है लेकिन पिछले दिनों किसी कारणवश यह पेड़ सूख गया, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालु निराश हैं और इसी खेजड़ी के पेड़ को पुनः हरा करने के लिए डॉक्टर गुलाब सिंह दंडवत यात्रा कर रहे हैं. उनको पूरा विश्वास है कि यात्रा पूरी होने पर खेजड़ी फिर से हरी हो जाएगी और अगर ऐसा होता है तो यह कलयुग में किसी चमत्कार से कम नहीं होगा.

एक समय था, जब लोग हर मर्ज के लिए किसी न किसी देवी-देवता की शरण मे जाते थे, जिसे इस आधुनिक युग में लोग अंधविश्वास भी कहते हैं लेकिन आधुनिक समय मे जब लोग चिकित्सकों का दरवाजा खटखटाते हैं. ऐसे में एक डॉक्टर का 65 साल की उम्र में अपनी सुख सुविधाएं छोड़कर दंडवत करते हुए हजार किलोमीटर की यात्रा करना और ईश्वर पर इतना प्रगाढ़ विश्वास आधुनिक युग मे एक नई इबारत से कम नहीं है.

जैसलमेर के नजदीक भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर स्थित तनोटराय माता मंदिर के चमत्कार के बारे में भारत पाकिस्तान युद्ध की कहानी हर भारतीय के जेहन में है लेकिन अगर डॉ. गुलाब सिंह की इस दंडवत यात्रा के बाद नेहड़ी हरी हो जाए तो तनोटराय का यह भी एक चमत्कार होगा.