नेता प्रतिपक्ष की CM गहलोत को नसीहत, बोले- नहीं संभाल पा रहे, एक सहयोगी मंत्री ही रख लें

इतना ही नहीं, कटारिया ने तो यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी संभालने के चलते अशोक गहलोत अगर गृह विभाग पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं तो कम से कम एक मंत्री को अपने सहयोगी के रूप में तो रखा ही जा सकता है. 

नेता प्रतिपक्ष की CM गहलोत को नसीहत, बोले- नहीं संभाल पा रहे, एक सहयोगी मंत्री ही रख लें
नेता प्रतिपक्ष ने पिछले एक साल में सांप्रदायिक तनाव के सबसे ज्यादा मुकदमों का ज़िक्र भी किया.

जयपुर: सरकार प्रदेश में लॉ एंड ऑर्डर (Law & Order) मजबूत करने की बात कर रही है. पुलिस के मुखिया के नाते डीजीपी क्राइम में आंकड़े जारी कर रहे हैं लेकिन नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया (Gulab Chand Kataria) ने सरकार की इन सभी कोशिशों पर तंज कसे हैं.

वसुंधरा सरकार में प्रदेश के गृह मंत्री रहे कटारिया ने सभी तरह के अपराधों में बढ़ोत्तरी के आरोप लगाते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाये. इतना ही नहीं, कटारिया ने तो यहां तक कह दिया कि मुख्यमंत्री पद की ज़िम्मेदारी संभालने के चलते अशोक गहलोत अगर गृह विभाग पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं तो कम से कम एक मंत्री को अपने सहयोगी के रूप में तो रखा ही जा सकता है. 

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद गृह विभाग पर सबसे बड़ा सवालिया निशान लग रहा है. यह सवाल उठाये हैं मौजूदा नेता प्रतिपक्ष और पिछली वसुंधरा सरकार में गृह मंत्री रहे गुलाबचंद कटारिया ने. डीजीपी भूपेंद्र यादव की प्रेस कॉन्फ्रेस में जारी किए गए एक साल के आपराधिक आंकड़ों के आधार पर कटारिया ने सरकार और पुलिस विभाग दोनों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया.

कटारिया ने कहा कि अपराध में कुल 31 फीसदी से ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ़ अपराध की बात हो या दलितों और बच्चों के खिलाफ, सभी तरह के अपराधों में बड़ी बढ़ोत्तरी हुई है. नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अपराध में इतनी ज्यादा बढ़ोत्तरी सरकार के लिए अशोभनीय है.

डकैती के मामलों में 127 फीसदी की बढ़ोत्तरी हैरान करने वाली
अपराध के आंकड़े गिनाते हुए काटरिया ने कहा कि डकैती के मामलों में तो सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई है. कटारिया ने कहा कि डकैती के मामलों में 127 फीसदी की बढ़ोत्तरी हैरान करने वाली है. उन्होंने कहा कि दुष्कर्म के मामले सबसे ज्यादा दुखदायी होते हैं और इसमें भी मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भारी इज़ाफ़ा हुआ. कटारिया ने कहा कि वे यह दावा कतई नहीं करते कि उनके कार्यकाल में ऐसी घटनाएं नहीं हुईं थीं लेकिन इस बार दुष्कर्म के 5 हज़ार 997 मुकदमे दर्ज हुए. नेता प्रतिपक्ष ने अपराध के आंकड़ों के आधार पर सरकार को खूब घेरा. उन्होंने कहा कि उनके गृह मंत्री रहते सभी तरह के अपराधों में मेहनत करके कमी लाई गई लेकिन इस बार प्रदेश शर्मनाक तरीके से देशभर में दूसरे नम्बर पर रहा है. कटारिया ने कहा कि गृह विभाग में नियमित मॉनिटरिंग की ज़रूरत होती है और मॉनिटरिंग से ही अपराध पर कन्ट्रोल किया जा सकता है.

अधिकारियों की ज़िम्मेदारी भी तय होनी चाहिए थी
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ही प्रदेश के गृह मंत्री हैं और अपने काम में व्यस्तता के चलते उन्हें पुलिस के कामकाज की मॉनिटरिंग करने के लिए समय नहीं है तो कम से कम विभाग में अपना एक सहयोगी मंत्री तो रख ही लेना चाहिए. नेता प्रतिपक्ष ने पिछले एक साल में सांप्रदायिक तनाव के सबसे ज्यादा मुकदमों का ज़िक्र भी किया. कटारिया ने कहा कि पांच साल में सांप्रदायिक उन्माद के जितने मामले नहीं हुए, उससे ज्यादा तो बीते एक साल में हो गए. उन्होंने इस मामले में सरकार पर पूरी तरह से फेल होने के आरोप लगाते हुए कहा कि इसके लिए अधिकारियों की ज़िम्मेदारी भी तय होनी चाहिए थी. 

अशोक गहलोत पर कसे तंज
कटारिया ने खुद सीएम और गृह मंत्री अशोक गहलोत से ही सवाल करते हुए कहा कि अपराध के आंकड़ों की तुलना के आधार पर अब गहलोत ही यह तय करके बताएं कि अपराध रोकने के मामले में ज्यादा कारगर कौन साबित हो पाया. नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि जिस गुलाबचंद कटारिया को एक कांस्टेबल का भी ट्रांसफर करने का अधिकार नहीं होने की बात कहकर अशोक गहलोत चुटकी लेते थे, वह ज्यादा कारगर था या पूरी सरकार के साथ गृह विभाग की कमान भी अपने हाथ में रखने वाले मौजूदा गृह मंत्री?

कटारिया ने कहा कि पुलिस और सरकार चाहे तो अभी भी प्रदेश में अपराधों पर लगाम लगाई जा सकती है लेकिन इसके लिए डे-टू-डे मॉनिटरिंग करनी होगी लेकिन उसके लिए भी अफसरों और गृह मंत्री को वक्त तो निकालना ही पड़ेगा.