2006 से अब तक 6 बार भड़की गुर्जर आंदोलन की चिंगारी, 72 लोगों की गई थी जानें

पीपलखेड़ा पाटोली में गुर्जर आंदोलन किए जाने के सालभर बाद ही गुर्जरों ने फिर ताल ठोकी. 

2006 से अब तक 6 बार भड़की गुर्जर आंदोलन की चिंगारी, 72 लोगों की गई थी जानें
प्रतीकात्मक तस्वीर.

जयपुर: गुर्जर...आरक्षण...और आंदोलन. ये तीन शब्द राजस्थान के लिए कोई नए नहीं हैं. सुने और पढ़े तो दशकों से जा रहे हैं, मगर पिछले 14 साल के दौरान तीनों ही शब्दों का मतलब गुर्जर Vs सरकार, यातायात ठप्प और जनजीवन पटरी से उतर जाना हो गया है. राजस्थान में कब कब लगी गुर्जर आरक्षण की चिंगारी. 

2006 से हुई गुर्जर आंदोलन की शुरूआत
देश में आरक्षण की चिंगारी तो आजादी के बाद से ही सुलग रही है, मगर राजस्थान में गुर्जर आंदोलन की चिंगारी सबसे पहले साल 2006 में भड़की. तब से लेकर अब तक रह-रहकर छह बार बड़े आंदोलन हो चुके हैं. इस दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकार रही, मगर किसी सरकार से गुर्जर आरक्षण आंदोलन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला.

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साल 2006 में एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर पहली बार गुर्जर राजस्थान के हिंडौन में सड़कों और रेल पटरियों पर उतरे थे. गुर्जर आंदोलन 2006 के बाद तत्कालीन भाजपा सरकार महज एक कमेटी बना सकी, जिसका भी कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला.

दूसरी बार में 28 लोग मारे गए
2006 में हिंडौन में रेल पटरियां उखाड़ने वाले गुर्जर कमेटी बनने के बाद कुछ समय के लिए शांत जरूर हुए थे, मगर चुप नहीं बैठे और 21 मई 2007 फिर आंदोलन का ऐलान कर दिया. गुर्जर आंदोलन 2007 के लिए पीपलखेड़ा पाटोली को चुना गया. यहां से होकर गुजरने वाले राजमार्ग को जाम कर दिया. इस आंदोलन में 28 लोग मारे गए थे. फिर चौपड़ा कमेटी बनी, जिसने अपनी रिपोर्ट में गुर्जरों को एसटी आरक्षण के दर्ज के लायक ही नहीं माना था.

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तीसरा बार में बढ़ा मौतों का आंकड़ा
पीपलखेड़ा पाटोली में गुर्जर आंदोलन किए जाने के सालभर बाद ही गुर्जरों ने फिर ताल ठोकी. सरकार से आमने-सामने की लड़ाई का ऐलान कर 23 मार्च 2008 को भरतपुर के बयाना में पीलूपुरा ट्रैक पर ट्रेनें रोकी. सात आंदोलनकारियों को पुलिस फायरिंग में जान गंवानी पड़ी. सात मौतों के बाद गुर्जरों ने दौसा जिले के सिंंकदरा चौराहे पर हाईवे को जाम कर दिया. नतीजा यहां भी 23 लोग मारे गए और गुर्जर आंदोलन 2008 तक मौतों का आंकड़ा 28 से बढ़कर 58 हो गया, जो अब तक 72 तक पहुंच चुका है. इसके बाद 2019 में सवाईमाधोपुर के मलारना में पटरियां रोककर गुर्जर आंदोलन हुआ.